Sunday 05/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
शोध की दिशा में मजबूत कदम-गढ़वाल विश्वविद्यालय में अनुसंधान कार्यशाला का तीसरा दिन ज्ञान-विस्तार के साथ संपन्नपहाड़ की धरोहर किनगोड़-दारूहल्दी के अंधाधुंध दोहन से लुप्ति की कगार पर पहुंचा अनमोल पौधापहाड़ की पीड़ा पर सिनेमा का प्रहार-असंद एगी में झलकी गैस संकट की सच्चाईदेवभूमि श्रीनगर से आस्था का विराट उत्सव-श्रीक्षेत्र में गूंजे भक्ति के स्वर,भव्य कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाबमुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष पर बड़ा सवाल: “विवेकाधीन” नहीं, “संपर्काधीन” बनने का आरोप“कर्मभूमि–जन्मभूमि में ‘राहत’ या ‘रिश्ते’?”स्लग- शिकायत पर जसपुर विधायक पहुँचे इण्डेन गैस एजेंसीपालिका ने गौसदन भेज निराश्रित गौ वंश। गोवंश को छोड़ने वाले पर होगी कार्रवाई ।उत्तम फर्त्याल बने रा0प्रा शिक्षक संघ चंपावत के कार्यकारी जिला अध्यक्ष पूर्व जिला अध्यक्ष का इस्तीफा ।नीलकंठ धाम में हनुमान जन्मोत्सव की रही धूम
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शोध की दिशा में मजबूत कदम-गढ़वाल विश्वविद्यालय में अनुसंधान कार्यशाला का तीसरा दिन ज्ञान-विस्तार के साथ संपन्न


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की शैक्षणिक धरोहर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित 10 दिवसीय अनुसंधान पद्धति कार्यशाला का तीसरा दिन अत्यंत ज्ञानवर्धक और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रही इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को शोध की गहराइयों से परिचित कराने का कार्य किया। आज के प्रथम एवं द्वितीय सत्र की मुख्य वक्ता प्रो.स्वाती नेगी रहीं,जो श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत हैं। वहीं तृतीय एवं चतुर्थ सत्र का संचालन डॉ.हर सिंह बिष्ट उप पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में प्रो.स्वाती नेगी ने अनुसंधान की मूल अवधारणा,शोध अभिकल्प,क्रियात्मक अनुसंधान तथा व्यवस्थित समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जटिल विषयों को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। द्वितीय सत्र में इन्हीं विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया,जिससे प्रतिभागियों को शोध प्रक्रिया की गहराई को समझने का अवसर मिला। तृतीय सत्र में डॉ.हर सिंह बिष्ट ने उद्धरण शैलियों,संदर्भ प्रबंधन उपकरणों तथा साहित्यिक चोरी जैसे गंभीर विषयों पर व्यावहारिक प्रदर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध में मौलिकता और नैतिकता के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। चतुर्थ सत्र में दिनभर की कार्यवाही की समीक्षा करते हुए आंकड़ा विश्लेषण के लिए एटलस.टीआई एवं एनवीवो सॉफ्टवेयर के प्रयोग की विस्तृत जानकारी दी गई,जिससे प्रतिभागियों को आधुनिक शोध तकनीकों से परिचित कराया गया। इस कार्यशाला की विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए मंच संचालन,प्रतिवेदन लेखन जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है,जिससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। कार्यशाला के संयोजक डॉ.देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया है,जो आगामी सत्रों में प्रत्येक दिन के प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से साझा करेंगे। यह पहल उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास को सुदृढ़ करेगी। वहीं सह-संयोजक डॉ.आलोक सागर गौतम ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए दिनभर के सत्रों के सफल समापन की घोषणा की। कार्यक्रम का कुशल संचालन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रतिभागी रिंकी पांडेय एवं गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रतिभागी अक्षिता चौधरी द्वारा किया गया। निश्चित रूप से यह कार्यशाला न केवल शोधार्थियों को नई दिशा दे रही है,बल्कि उत्तराखंड की शैक्षणिक परंपरा को भी सशक्त करने का कार्य कर रही है।

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