स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रशासन का फोकस-डीएम ने अस्पताल सुधार के दिए कड़े निर्देश

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक,सुदृढ़ और जनोन्मुख बनाने की दिशा में अब निर्णायक पहल शुरू हो गई है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने आज अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया और इसके तुरंत बाद चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक में सुधारात्मक कार्यों पर ठोस फैसले लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ओपीडी, इमरजेंसी,सर्जिकल वार्ड,विभिन्न विभागों और परीक्षण कक्षों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने डॉक्टरों,नर्सिंग स्टाफ,मरीजों और तीमारदारों से सीधे संवाद कर अस्पताल की वास्तविक स्थिति को समझा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करते हुए उन्होंने मौके पर ही सुधार के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने अस्पताल में लैप्रोस्कोप,इको मशीन,आधुनिक पैथोलॉजी उपकरण और मल्टी-पैरा मॉनिटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए,ताकि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार मिल सके। अल्ट्रासाउंड कक्ष और परीक्षण सुविधाओं को और अधिक उन्नत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। स्वच्छता को लेकर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अस्पताल परिसर में पेयजल,वॉशरूम और वार्डों की सफाई व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वार्डों में फर्श की नियमित सफाई सुनिश्चित करने और समग्र स्वच्छता में सुधार लाने के निर्देश दिए। इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण के दौरान उन्होंने ड्यूटी व्यवस्था,दवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता की समीक्षा की। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड के विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हुए दवा स्टोर को अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर जगह खाली करने के निर्देश दिए,ताकि आपातकालीन सेवाएं और अधिक प्रभावी बन सकें। तीमारदारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने गद्देदार बेंचों की व्यवस्था,वार्डों में टाइल्स लगाने,लॉकरों की पेंटिंग और सातों दिन अलग-अलग रंग की चादरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही व्हीलचेयर की नियमित सफाई बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने आयुष्मान योजना के अधिकतम लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने और अस्पताल में हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही काउंसलिंग सेवाओं को मजबूत करते हुए यौनजनित रोगों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए फील्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ाने को कहा। जिलाधिकारी ने फिजियोथेरेपी,ईएनटी,नेत्र विभाग का निरीक्षण करते हुए एंडोस्कोपी यूनिट और फेको प्रशिक्षण जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने गैर संचारी रोग कक्ष को डेंगू वार्ड के रूप में उपयोग करने,दंत सेवाओं को सुदृढ़ करने और नशामुक्ति के बाद स्वस्थ हुए मरीजों की प्रेरणादायक कहानियों को प्रचारित करने के निर्देश भी दिए। बैठक के दौरान ओपीडी और आईपीडी मरीजों की अपेक्षाकृत कम संख्या पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार कर मरीजों का भरोसा जीतना होगा। उन्होंने संस्थागत प्रसव की कम संख्या पर भी चिंता व्यक्त करते हुए इस दिशा में विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी प्रत्येक माह अस्पताल का निरीक्षण करेंगे,जिससे सतत निगरानी और सुधार सुनिश्चित हो सके। वित्तीय प्रबंधन पर सख्ती दिखाते हुए उन्होंने अनावश्यक व्यय पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया। अस्पताल के व्यापक सुदृढ़ीकरण के लिए जिलाधिकारी ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मैटरनिटी ओटी और इमरजेंसी सेक्शन में सिविल कार्यों की मंजूरी,सभी ओपीडी में डिजिटल टोकन सिस्टम,सोलर प्लांट स्थापना तथा जनरेटर की व्यवस्था जैसे फैसले लिए गए। साथ ही तीमारदारों के लिए भोजन दर तय कर प्रदर्शित करने,दवाओं के परिवहन हेतु वाहन उपलब्ध कराने और शव वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बजट की कमी स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा नहीं बनेगी और जिला चिकित्सालय को एक आधुनिक,सुव्यवस्थित और जनसुलभ स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला,मुख्य कोषाधिकारी नमिता सिंह,प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक एल.डी.सेमवाल,विधायक प्रतिनिधि तपोनिधि बडोनी सहित अन्य चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में जमीनी बदलाव की शुरुआत का संकेत है,जिससे आने वाले समय में जनपदवासियों को बेहतर और भरोसेमंद चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
