संघर्ष की मशाल,जनसेवा की मिसाल-स्व.रणजीत सिंह भण्डारी पुन्नी को उमड़े जनसैलाब ने दी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जुझारू सिपाही,पूर्व छात्रसंघ सचिव हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य स्व.रणजीत सिंह भण्डारी पुन्नी की पुण्यतिथि पर श्रीकोट में श्रद्धा,संवेदना और सम्मान का सैलाब उमड़ पड़ा। मेडिकल कॉलेज गेट के समीप स्थापित उनकी प्रतिमा पर परिजनों,मित्रों,व्यापारियों,युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा का वातावरण भावुकता से भरा रहा। हर आंख नम थी और हर जुबां पर स्व.भण्डारी के संघर्ष,सादगी और जनसेवा की चर्चाएं थीं। वक्ताओं ने कहा कि पुन्नी केवल एक नाम नहीं,बल्कि जनआंदोलन की वह सशक्त पहचान थे,जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित कर दिया। इस अवसर पर उनके बड़े भाई मनवर सिंह भण्डारी,धीरेंद्र सिंह भण्डारी,भतीजे विवेक भण्डारी,भतीजी सीमा भण्डारी,परम मित्र प्रभाकर बाबुलकर,मामा आनंद सिंह रावत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। व्यापार सभा श्रीकोट के अध्यक्ष नरेश नौटियाल एवं सचिव प्रमोद राणा सहित क्षेत्र के व्यापारी वर्ग ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व.भण्डारी के परम मित्र प्रभाकर बाबुलकर ने भावुक होते हुए कहा कि रणजीत केवल मेरे मित्र नहीं बल्कि मेरे लिए एक मार्गदर्शक और सच्चे साथी थे। उनका सादा जीवन,स्पष्ट सोच और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा आज भी मुझे प्रेरित करता है। उनका जाना मेरे जीवन की अपूरणीय क्षति है। वहीं भतीजी सीमा भण्डारी ने नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि चाचा हमारे परिवार की सबसे मजबूत कड़ी थे। उन्होंने हमें हमेशा ईमानदारी,संघर्ष और दूसरों की मदद करने की सीख दी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं,लेकिन उनके आदर्श हमें हर कदम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्व.रणजीत सिंह भण्डारी का जीवन नई पीढ़ी के लिए एक प्रकाश स्तंभ है। उनका संघर्ष,उनकी सादगी और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे स्व.रणजीत सिंह भण्डारी पुन्नी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा और जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। एक ऐसा व्यक्तित्व,जो सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं,बल्कि जनमानस की भावनाओं में सदैव जीवित रहेगा।
