टीएमयू के प्रो. राजुल रस्तोगी की झोली में एक और प्रतिष्ठित अवार्ड

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रेडियोडाग्नोसिस विभाग की सीनियर फैकल्टी एवम् कॉलेज रिसर्च कमेटी के चेयरमैन प्रो. राजुल रस्तोगी केयरकॉन 2026 समारोह में इमर्जिंग क्लिनिकल लीडर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के रेडियोडाग्नोसिस विभाग की सीनियर फैकल्टी एवम् कॉलेज रिसर्च कमेटी के चेयरमैन प्रो. राजुल रस्तोगी की झोलीमें एक और प्रतिष्ठित पुरस्कार आया है। प्रो. रस्तोगी को इमर्जिंग क्लिनिकल लीडर ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित केयरकॉन 2026 समारोह में स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए प्रो. रस्तोगी को इस अवार्ड से नवाजा गया है। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रो. रस्तोगी ने कहा, यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन केवल नई तकनीकों को अपनाने से नहीं, बल्कि पूरे केयर कंटिन्यूम में स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी को नए सिरे से डिज़ाइन करने से संभव होगा। प्रो. रस्तोगी ने बताया, पैसिफिक वनहेल्थ ग्रुप की ओर से आयोजित केयरकॉन 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान खोजने का एक प्रभावी मंच था। इस दौरान डायग्नोस्टिक्स, हेल्थ टेक्नोलॉजी और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों एवम् निर्णयकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श का अवसर मिला, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को लेकर नई सोच विकसित हुई।
मोरक्को में प्रो. राजुल ने दिया विशेष प्रशिक्षण
मोरक्को-फ्रांस के संयुक्त सहयोग से मोरक्को के कैसाब्लांका में संचालित प्रतिष्ठित हॉस्पिटल यूनिवर्सिटेयर इंटरनेशनल शेख खलीफा में ड्यूल-एनर्जी कंप्यूटेड टोमोग्राफी-डीईसीटी की उन्नत क्लीनिकल एप्लीकेशंस पर विशेष प्रशिक्षण में प्रो. राजुल रस्तोगी ने बतौर ट्रेनर प्रतिभगियों को प्रशिक्षित किया। प्रो. रस्तोगी ने बतौर एक्सपर्ट कहा, तकनीकी प्रगति के साथ मरीजों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक लाइव स्कैन में एएलएआरए- एस लो एस रिजनेबली एचीवेबल सिद्धांत का विशेष रूप से पालन किया गया, ताकि न्यूनतम संभव विकिरण के संग सर्वाेत्तम गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं के साथ मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही आधुनिक रेडियोलॉजी की आधारशिला है। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य क्लीनिकल प्रैक्टिस में ड्यूल-एनर्जी सीटी तकनीक की प्रभावशीलता और इसके व्यापक उपयोग को प्रदर्शित करना रहा है। इस दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि कैसे यह आधुनिक तकनीक विभिन्न जटिल रोगों के अधिक सटीक और बेहतर निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
