हरेला पर्व पर पर्वतीय संस्कृति की छटा, राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ट्रस्ट (रजिस्टर्ड), भारत द्वारा बरेली में पर्वतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हरेला पर्व हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया ने हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व प्रकृति संरक्षण, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है। इस अवसर पर सात प्रकार के बीज बोने की परंपरा निभाई जाती है। अंकुरित हरेला को बड़े-बुजुर्ग परिवार के छोटे सदस्यों के सिर पर रखकर उन्हें सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरेला पर्व का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह से भी माना जाता है। उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला यह प्रमुख लोकपर्व मानसून के आगमन, पर्यावरण संरक्षण, अच्छी फसल और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर वृक्षारोपण करने और धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प भी लिया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान पर्वतीय परंपरा के अनुसार पुआ, उड़द की दाल के बड़े, खीर सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजन बनाए गए। सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया, राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश मेहंदीरत्ता, जिला अध्यक्ष अंजू शुक्ला, तरुण कपूर, अनीता सोलंकी, रेनू शर्मा, बबीता शर्मा, कंचन सिंह, अंजू ठाकुर, राम किशोर सहित संस्थान के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
