Thursday 23/ 07/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

अब गांवों में भी होगा वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन-ठोस अपशिष्ट नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को पंचायत अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वच्छ,सुंदर और पर्यावरण अनुकूल गांवों की परिकल्पना को धरातल पर उतारने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। अब ग्राम पंचायतें केवल विकास योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं करेंगी,बल्कि वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल भी पेश करेंगी। इसी उद्देश्य को लेकर सोमवार को विकास भवन सभागार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य में 1 अप्रैल 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को ग्राम स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन,स्रोत पर कचरे का पृथक्करण,संग्रहण,परिवहन,प्रसंस्करण एवं सुरक्षित निस्तारण की संपूर्ण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियों,जनसहभागिता तथा व्यवहारिक क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांवों का सपना तभी साकार होगा,जब प्रत्येक नागरिक कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझे। उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक ग्राम पंचायत में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को घरों से ही कचरे का पृथक्करण करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसहभागिता के बिना किसी भी स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक गांव के समीप चार रंगों के कूड़ेदान स्थापित किए जाएंगे,जिनमें अलग-अलग श्रेणियों का कचरा एकत्र किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित वाहनों के माध्यम से कचरे का संग्रहण कर उसे संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा,जहां वैज्ञानिक तकनीकों से उसका निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांवों के छोटे बाजारों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जाएगी तथा दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमों का अनिवार्य रूप से पालन कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्तर पर कम्पोस्टिंग,पुनर्चक्रण और स्वच्छता तंत्र को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का उद्देश्य वैज्ञानिक,व्यवस्थित और तकनीक आधारित कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत घरों,दुकानों,संस्थानों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसके अंतर्गत हरे डिब्बे में गीला एवं जैविक कचरा,नीले डिब्बे में सूखा एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरा,लाल डिब्बे में सैनिटरी एवं घरेलू हानिकारक कचरा तथा काले डिब्बे में विशेष श्रेणी के अपशिष्ट का संग्रह किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन,निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा एक मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है,जिसके माध्यम से कचरा प्रबंधन व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा सकेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली,सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता,अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण,बल्क वेस्ट जनरेटर की जिम्मेदारियों,कम्पोस्टिंग,पुनर्चक्रण तथा ग्राम पंचायतों की भूमिका के संबंध में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही होटल,बड़े आवासीय परिसरों,शिक्षण संस्थानों एवं अन्य बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के लिए अपने स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय,जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया,एडीओ पंचायत दिनेश रावत,ग्राम पंचायत विकास अधिकारी रचना शाह,प्रीति,योगेंद्र राणा,विपुल,आशीष नेगी सहित बड़ी संख्या में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में अधिकारियों से आह्वान किया गया कि वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को केवल सरकारी योजना न मानकर जनभागीदारी का अभियान बनाएं,ताकि उत्तराखंड के गांव स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में पूरे देश के लिए आदर्श बन सकें।

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