Thursday 23/ 07/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में उत्तराखंड ने बढ़ाए मजबूत कदम-202 में से 71 लक्ष्य पूरे,बाल वाटिका से डिजिटल शिक्षा तक दिखी उल्लेखनीय प्रगति


देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। नई शिक्षा नीति-2020 को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारने की दिशा में उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कौशल विकास,डिजिटल शिक्षण,समावेशी शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण तक राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में विद्यालयी शिक्षा विभाग ने अब तक 202 में से 71 लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है,जबकि 111 लक्ष्यों पर युद्धस्तर पर कार्य जारी है। राज्य में नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद सबसे अधिक जोर प्री-प्राइमरी शिक्षा (बाल वाटिका) को मजबूत बनाने पर दिया गया है। इसी क्रम में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) तथा प्रदेश के सभी 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कुल 14 मॉडल बालवाटिकाएं स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 5,982 सह-स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल वाटिकाओं का सफल संचालन किया जा रहा है,जिससे बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। एससीईआरटी की निदेशक वंदना गब्र्याल ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सार्थक ट्रैकर के माध्यम से राज्य को नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 202 लक्ष्य सौंपे गए थे। इनमें से 71 लक्ष्य पूरी तरह पूरे कर लिए गए हैं,जबकि 111 लक्ष्यों पर तेजी से कार्य चल रहा है। शेष 20 लक्ष्यों पर भारत सरकार की विस्तृत दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाल वाटिका संचालन को प्रभावी बनाने के लिए 11,196 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,शिक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों को दो चरणों में आधुनिक वर्चुअल स्टूडियो के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों की शिक्षा को रोचक,सहज और आनंददायक बनाने के लिए सभी प्राथमिक विद्यालयों में जादुई पिटारा उपलब्ध कराया गया है,जिसमें 27 प्रकार के खिलौने तथा 13 प्रकार की शिक्षण सामग्री शामिल है। इसके अतिरिक्त सभी विद्यालयों में आरोही स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल भी लागू किया गया है, जिससे बच्चों का विद्यालयी वातावरण से सहज जुड़ाव सुनिश्चित हो सके। नई शिक्षा नीति के तहत निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को भी प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने के लिए विशेष पुस्तिकाएं तैयार कर विद्यालयों में पढ़ाई जा रही हैं,जिनकी प्रगति ऐप के माध्यम से नियमित निगरानी की जा रही है। शिक्षा विभाग ने विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया है। अब तक 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 3,198 ड्रॉपआउट बच्चों को चिन्हित कर ब्रिज कोर्स के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। वहीं 5,086 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में से 354 बच्चों को गृह-आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। वंदना गब्र्याल ने बताया कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की अनुशंसाओं के अनुरूप राज्य का नया पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया गया है। साथ ही कौशल आधारित शिक्षक प्रशिक्षण,समावेशी एवं समान शिक्षा,व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार,बहुभाषिक शिक्षा,डिजिटल शिक्षण,ऑनलाइन शिक्षा,विद्यालयी संसाधनों का विकास तथा उल्लास कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार,शिक्षा विभाग,एससीईआरटी तथा अन्य सभी संबद्ध संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से शेष लक्ष्यों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर उत्तराखंड को नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के प्रत्येक प्रावधान को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि सार्थक ट्रैकर पर निर्धारित 202 लक्ष्यों में से 71 लक्ष्यों की प्राप्ति राज्य के शिक्षा विभाग,शिक्षकों और सभी संबंधित संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण,नवाचार आधारित,कौशलयुक्त एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा पहुंचाना है,ताकि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बन सके।

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