Thursday 23/ 07/ 2026 

Bharat Najariya
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मसूरी में ‘मलबा बम’ का खतरा, रातों-रात घरों में घुसा पहाड़, पांच बच्चों समेत परिवार ने भागकर बचाई जान



मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण और मलबा प्रबंधन की गंभीर पोल खोल दी है। रविवार देर रात जेपी बैंड क्षेत्र में जो हुआ, उसने स्थानीय लोगों को डरा दिया है। पहाड़ी से बहकर आया भारी मलबा सीधे पीडब्ल्यूडी आवासों में घुस गया। घरों के कमरे मिट्टी और पत्थरों से भर गए, घरेलू सामान तबाह हो गया और एक परिवार के सात सदस्य मौत के मुंह से बाल-बाल बच गए। रात के समय अधिकांश लोग सो रहे थे। तभी तेज बारिश के बीच अचानक पहाड़ी से मलबे का तेज बहाव शुरू हुआ। देखते ही देखते मिट्टी, पत्थर और बोल्डर पीडब्ल्यूडी आवासों तक पहुंच गए। प्रभावित परिवारों के अनुसार कुछ ही मिनटों में कमरों में कई फीट तक मलबा भर गया।
सबसे भयावह स्थिति उस परिवार की रही जिसके घर में दंपति के साथ पांच बच्चे मौजूद थे। अचानक मलबा घुसने से घर में चीख-पुकार मच गई। परिवार ने किसी तरह बाहर भागकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देर हो जाती तो यह घटना बड़ी जनहानि में बदल सकती थी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों ने केवल बारिश को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि जेपी बैंड के ऊपर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं और निर्माण से निकला मलबा नियमों के विपरीत ढलानों, जंगलों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों में डाला गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से मौजूद प्राकृतिक नालों को भी कई जगह बाधित किया गया है। बारिश के दौरान यही मलबा पानी के साथ बहकर नीचे आया और रिहायशी इलाकों में तबाही का कारण बना। लोगों का सवाल है कि यदि शिकायतें पहले से की जा रही थीं तो जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
मसूरी में पिछले कुछ वर्षों में लगातार भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा बहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में पानी वाले बैंड पर सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद अब जेपी बैंड की घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की निगरानी और मलबा निस्तारण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लोगों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण के दौरान निकाले गए मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं होने पर वह बारिश के दौरान मलबा बम बन जाता है, जो नीचे बसे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय सभासद शिवानी भारती और पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी मौके पर पहुंचीं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने निर्माण कार्यों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मीरा सकलानी ने कहा कि प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
मसूरी में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर पहाड़ों पर निर्माण कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या प्राकृतिक जल निकासी मार्गों और ढलानों पर डाले जा रहे मलबे की नियमित जांच होती है? और क्या अगली बारिश से पहले ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी?, जेपी बैंड की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी शहर के लिए चेतावनी है कि यदि अनियोजित निर्माण और मलबा निस्तारण पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं।

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