उत्तराखंड ने खोया जनसंघर्षों का सशक्त प्रहरी-पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के निधन से कांग्रेस में शोक की लहर

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता,पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं श्रमिक हितों के प्रखर पैरोकार हीरा सिंह बिष्ट 81 वर्ष की उम्र में हृदय गति रुकने से हुए आकस्मिक निधन पर श्रीनगर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को कांग्रेस परिवार और उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट ने अपना संपूर्ण सार्वजनिक जीवन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति,श्रमिकों,कर्मचारियों और वंचित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया। वे केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं,बल्कि जनभावनाओं को समझने वाले संवेदनशील जननेता भी थे। उनकी सादगी,स्पष्टवादिता और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें राजनीतिक जीवन में विशिष्ट पहचान दिलाता रहा। हीरा सिंह बिष्ट ने अविभाजित उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में परिवहन,श्रम एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक दायित्व निभाया। वे लंबे समय तक इंटक के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में अनेक श्रमिक आंदोलनों को नई दिशा मिली और उन्होंने संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया। श्रीनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से कांग्रेस ने अपना एक अनुभवी,कर्मठ और जनप्रिय नेता खो दिया है। नेताओं ने कहा कि उनके विचार,संघर्ष और जनसेवा की विरासत सदैव नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष सूरज घिल्डियाल,पीसीसी सदस्य बीरेंद्र सिंह नेगी,श्रीकोट कांग्रेस अध्यक्ष संजय फौजी,निशांत कण्डारी,लाल सिंह नेगी,शिव लाल,सुरेन्द्र सिंह चौहान,भगत सिंह डागर,बलवीर सिंह दानू,अंजू भट्ट,सतीश पटवाल,माही बर्तवाल,मीना नेगी,सुधांशु नौडियाल,अभिषेक घिल्डियाल,सहित अनेक कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का संघर्ष,उनकी सादगी,जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और श्रमिक हितों के लिए उनका आजीवन समर्पण उत्तराखंड की राजनीतिक विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय रहेगा। उनका निधन केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे उत्तराखंड के सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके योगदान को लंबे समय तक सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाएगा।
