Friday 31/ 07/ 2026 

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विश्व के प्रथम सनातन साहित्यिक मंच “साहित्यिक सचेतना” द्वारा प्रथम गुरुपूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन

लगभग 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद, 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने सतवाणी का अमृतरस पिया

गुरुग्राम, 29 जुलाई 2026।

भारतीय सनातन साहित्य को साहित्य के रूप में प्रतिष्ठित एवं जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से स्थापित विश्व के प्रथम सनातन साहित्यिक मंच “साहित्यिक सचेतना” द्वारा अपना प्रथम गुरुपूर्णिमा महोत्सव आज गढ़वाल सभा स्थित श्री बद्रीकेदारनाथ मंदिर, रवि नगर, गुरुग्राम में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुपूजन, वैदिक हवन एवं अतिथि सत्कार से हुआ। इसके उपरांत गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित सतवाणी, आध्यात्मिक उद्बोधन एवं काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।

साहित्यिक सचेतना के संस्थापक एवं मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव श्री नरेंद्र रावत ‘नरेन’ ने अपने प्रेरक उद्बोधन में सनातन धर्म में गुरु की सर्वोच्च महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान तथा आत्मबोध से ब्रह्मबोध की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने महर्षि वेदव्यास जी के अवतरण दिवस एवं उनके महान उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्हें महागुरु एवं विश्वगुरु की संज्ञा दी। साथ ही उन्होंने चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष), चार वर्ण, चार आश्रम, तीन ऋण तथा संस्कारों की महत्ता को सरल एवं तर्कपूर्ण शैली में समझाया तथा सभी से सनातन संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार के अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने सतवाणी का अमृतरस ग्रहण किया, जबकि 20 से अधिक साहित्यकारों एवं श्रद्धालुओं ने गुरु महिमा पर अपने श्रद्धासुमन काव्यपाठ एवं उद्बोधन के माध्यम से अर्पित किए।

काव्यपाठ करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में आदरणीया प्रीति डिमरी ‘प्रीत’, उर्मिला जी, देवेंद्र राघव जी, किरण कांडपाल जी, आकाश जी, रामसिंह भंडारी जी, बृजेंद्र रावत जी, अनूप नौटियाल जी, दिनेश रावत जी, देवेंद्र रौतेला जी, मोहनसिंह रावत जी, मनीषा त्यागी जी तथा योगेश गहतोड़ी जी ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं एवं उद्बोधनों से गुरु-भक्ति का वातावरण निर्मित किया।

इनके अतिरिक्त मदन सिंह ठाकुर जी, सोवन नयाल जी, चंदन बिष्ट जी, सुमंत नेगी जी एवं प्रदीप नेगी जी, भवान सिंह बिष्ट जी, श्री सुरेश चंद्र काला, श्री करन सिंह बिष्ट, श्री कैलाश जीना जी, श्री कुबेर जमनाल जी, श्री पूरन सिंह बिष्ट जी, श्री संजय किश्वान जी, श्री अनिल मिश्रा जी, सतीश चंद जी एवं पंडित सुमित शास्त्री जी आदि 50 से अधिक लोगों की उपस्थिति गरिमामई रही।

कार्यक्रम का गरिमामय संचालन साहित्यिक सचेतना एवं स्वास्तिक मासिक पत्रिका की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सम्पादिका आदरणीया प्रीति डिमरी ‘प्रीत’ ने अत्यंत कुशलता एवं प्रभावशाली शैली में किया।

इस आयोजन में मुख्य यजमान आदरणीय देवेंद्र राघव जी, मुख्य व्यवस्थापक आदरणीय रामसिंह भंडारी जी एवं आदरणीय मोहनसिंह रावत जी सहित संस्था के पदाधिकारियों, साहित्यकारों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनके सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

महोत्सव के समापन पर आयोजित महाप्रसाद (भव्य भंडारे) में लगभग 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु-परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने महर्षि वेदव्यास जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भारतीय सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा तथा आध्यात्मिक चेतना के संवर्धन का संकल्प लिया।

यह आयोजन साहित्यिक सचेतना की आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा का ऐतिहासिक प्रथम अध्याय सिद्ध हुआ। संस्था ने भविष्य में भी भारतीय सनातन साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म एवं मानवीय मूल्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार हेतु ऐसे जनजागरण कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।

प्रीति डिमरी ‘प्रीत’
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सम्पादिका
साहित्यिक सचेतना एवं स्वास्तिक मासिक पत्रिका

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