Sunday 02/ 08/ 2026 

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भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े बिना शिक्षा अधूरी–कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह


श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा,भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा और संस्कृति के समन्वय का प्रेरक संदेश दिया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत शुक्रवार को विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित हिमालयी पुरातत्व एवं नृवंशीय संग्रहालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय भाषाओं का समावेश विषय पर विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि उसे भारतीय संस्कृति,परंपराओं,जीवन मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से भी गहराई से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न संस्कृतियों,भाषाओं और परंपराओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं तथा एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त बनाते हैं। कुलपति प्रो.सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल वेदों,उपनिषदों और प्राचीन ग्रंथों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें परिवार व्यवस्था,सामाजिक समरसता,स्वस्थ जीवनशैली,आयुर्वेद,योग,पारंपरिक औषधीय ज्ञान,प्रकृति के साथ संतुलित जीवन,पर्यावरण संरक्षण तथा नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विशाल अनुभव समाहित है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को इन जीवनोपयोगी मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला हैं। मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों की रचनात्मकता,आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भारतीय भाषाओं को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा,लोक संस्कृति,हिमालयी विरासत,पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान,प्राचीन शिक्षा प्रणाली तथा भारतीय भाषाओं के विविध आयामों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों,शोधार्थियों और शिक्षकों ने भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध विरासत को निकट से समझा। कार्यक्रम में डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों और उसके क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ.अनूप सेमवाल ने किया,जबकि अंत में डॉ.राकेश नेगी ने सभी अतिथियों,प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी,संकायाध्यक्ष (नियुक्ति एवं प्रोन्नति) प्रो.मोहन पवार,चौरास परिसर निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी,मुख्य नियंता एस.एस.बिष्ट सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक,शोधार्थी,विद्यार्थी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।

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