अष्टावक्र महादेव धाम में गूंजा स्वच्छता,सेवा और शिवभक्ति का संदेश-भागीरथी कला संगम ने चलाया प्रेरक अभियान

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पुण्यभूमि,जहां प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है,वहां स्थित पौराणिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र अष्टावक्र महादेव धाम में रविवार 2 अगस्त 2026 को सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था भागीरथी कला संगम के सदस्यों ने स्वच्छता,सेवा और शिवभक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के उपरांत सभी सदस्यों ने भगवान अष्टावक्र महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विश्व कल्याण,पर्यावरण संरक्षण तथा समाज में सुख-समृद्धि की कामना की। प्रातःकाल से ही संस्था के सदस्य अष्टावक्र महादेव धाम पहुंचे और हाथों में झाडू लेकर मंदिर परिसर,सीढ़ियों तथा आसपास के क्षेत्र की सफाई के साथ ही पौधारोपण भी किया। सदस्यों ने संदेश दिया कि स्वच्छ मंदिर,स्वच्छ तीर्थ और स्वच्छ पर्यावरण ही सच्ची ईश्वर भक्ति का आधार है। स्वच्छता के पश्चात सभी ने शिवलिंग पर जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देशवासियों के मंगल की प्रार्थना की। श्रीनगर से लगभग आठ किलोमीटर दूर खिर्सू-बुघाणी रोड़ पर स्थित खोला गांव के ऊपर यह पौराणिक मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अद्वितीय संगम है। मुख्य सड़क से लगभग पांच सौ मीटर की सहज चढ़ाई के बाद श्रद्धालु इस दिव्य धाम तक पहुंचते हैं। मार्ग में जगह-जगह लगाए गए स्टील के विश्राम बेंच यात्रियों को सुविधा प्रदान करते हैं,जिससे हर आयु वर्ग का व्यक्ति आसानी से मंदिर तक पहुंच सकता है। अष्टावक्र महादेव धाम पहुंचते ही श्रद्धालु स्वयं को प्रकृति की अनुपम गोद में अनुभव करता है। चारों ओर फैले घने चीड़ के वन,शीतल एवं निर्मल वातावरण,पक्षियों का मधुर कलरव और हिमालय की मनोरम श्रृंखलाएं मन को अलौकिक शांति का अनुभव कराती हैं। मंदिर परिसर से चौखम्बा पर्वत, मां नंदा देवी की हिमाच्छादित चोटियां,मां चंद्रबदनी मंदिर,पौड़ी शहर,चौरास,श्रीकोट,श्रीनगर का ऐतिहासिक नगर तथा कल-कल बहती अलकनंदा नदी का मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है। भागीरथी कला संगम के सदस्यों ने कहा कि उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल सरकार का नहीं,बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। ऐसे स्वच्छता अभियान समाज में सेवा,संस्कार,पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक चेतना का संदेश देते हैं तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद संस्था के सदस्यों का उत्साह किसी भी प्रकार कम नहीं हुआ। सीमित संख्या में उपस्थित सदस्यों ने पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ स्वच्छता अभियान को सफल बनाया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम निरंतर संचालित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर संस्था के संरक्षक दीनबंधु सिंह चौहान,रघुवीर सिंह रावत,हरेंद्र सिंह तोमर,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। भागीरथी कला संगम ने श्रद्धालुओं एवं प्रकृति प्रेमियों से अपील की कि जब भी अवसर मिले,एक बार इस दिव्य और पौराणिक तीर्थ अष्टावक्र महादेव धाम अवश्य पहुंचें,भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें तथा इस पवित्र धाम की स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने में अपना योगदान दें।
