श्रीनगर में कलश यात्रा के साथ श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ-गुरु की शरण में ही जीवन में आता है प्रकाश–गोपालमणि महाराज

श्रीनगर गढ़वाल। धर्मनगरी श्रीनगर में आध्यात्मिक वातावरण उस समय भक्तिमय हो उठा,जब श्रीराम कथा धेनु मानस गौ टीका का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। श्रीनगर की सराफा धर्मशाला में आयोजित कथा के शुभारंभ से पूर्व श्रद्धालुओं ने शारदा घाट से कलश यात्रा निकाली,जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सराफा धर्मशाला पहुंची। इस दौरान पूरा नगर भक्तिमय जयघोष से गूंज उठा। कलश यात्रा में श्रद्धालुओं के साथ संस्कृत विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं आचार्यों ने भी उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। पारंपरिक धार्मिक वातावरण में निकली यात्रा ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया और भगवान श्रीराम के जयकारों से वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। श्रीराम कथा के व्यास पीठ से गौ,गंगा एवं कृपा के उपासक गोपालमणि महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु के बिना जीवन में वास्तविक प्रकाश आना संभव नहीं है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर और भ्रम से सत्य की ओर ले जाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी गुरु के पास जाएं तो अहंकार को त्यागकर जाएं। मनुष्य को यह भाव रखना चाहिए कि मैं कुछ नहीं हूं,तभी वह गुरु के ज्ञान और आशीर्वाद को आत्मसात कर सकता है। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य के भीतर ज्ञान के द्वार बंद कर देता है,जबकि विनम्रता उसे सत्य और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ाती है। गोपालमणि महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक कथा नहीं,बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली ज्ञानगंगा है। भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति परिवार,समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बेहतर निर्वहन कर सकता है। कथा के शुभारंभ अवसर पर निकली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। शारदा घाट से शुरू हुई यात्रा श्रीनगर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए सराफा धर्मशाला पहुंची। धार्मिक ध्वजों और जयकारों के बीच निकली यात्रा ने श्रीनगर के वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। आयोजकों ने बताया कि कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र,उनके आदर्शों और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही गौसेवा,गंगा संरक्षण और धर्म-संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है। कार्यक्रम में संस्कृत विद्यालय एवं जयदयाल स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों की उपस्थिति ने धार्मिक आयोजन में नई ऊर्जा का संचार किया। आचार्यों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जुड़े आयोजनों में सहभागिता के महत्व से भी अवगत कराया। इस अवसर पर रुद्रप्रयाग से सच्चिदानंद नौटियाल,काली प्रसाद सेमवाल,अतुल भंडारी,परमानंद मिस्त्री,कलम सिंह,विक्रम सिंह,प्रकाश चंद मैठाणी,सुरेश गैरोला,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,आचार्य इंद्रमणि नौटियाल,आचार्य कुशलानंद कंसवाल,महावीर खंडूरी,राजेंद्र भट्ट,मनीष भट्ट,अमित खंडूरी,प्रचारक कमल किशोर भट्ट,गोपाल रतूड़ी,अमन रतूड़ी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रीराम कथा के शुभारंभ के साथ ही श्रीनगर में आगामी दिनों तक आध्यात्मिक वातावरण बना रहेगा। कलश यात्रा से शुरू हुई यह धार्मिक यात्रा श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों,गुरु की महिमा और गौ-संस्कृति के संरक्षण का संदेश दे रही है।
