गढ़वाल विश्वविद्यालय में विश्व फार्मासिस्ट्स दिवस की धूम-नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने का आह्वान

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग में विश्व फार्मासिस्ट्स दिवस-2026 उत्साह,रचनात्मकता और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के साथ मनाया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य विषय स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्ट्स को सशक्त बनाना रहा। समारोह में फार्मास्युटिकल शिक्षा में नवप्रवर्तन,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं,पारंपरिक भारतीय औषधीय ज्ञान तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट्स की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों,शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। समारोह का उद्देश्य केवल फार्मासिस्ट्स के योगदान को रेखांकित करना ही नहीं,बल्कि भावी फार्मासिस्ट्स को बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य,आधुनिक तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व के अनुरूप तैयार करना भी रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी,सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने में फार्मासिस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रही है। ऐसे में फार्मेसी के विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी क्षमताओं से भी स्वयं को सुसज्जित करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे निरंतर नई क्षमताएं सीखें और दवा प्रबंधन,स्वास्थ्य सेवा वितरण तथा रोगी देखभाल को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है,जब उसका उपयोग मानव स्वास्थ्य और समाज के व्यापक हित में किया जाए। फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अब्दुल फारुख ने फार्मासिस्ट्स की बदलती भूमिका और भविष्य में उपलब्ध होने वाले अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की बदलती आवश्यकताओं के बीच फार्मेसी शिक्षा और व्यवहार में नवप्रवर्तन को आवश्यक रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से समस्या-समाधान,तकनीकी दक्षता और उद्यमिता कौशल विकसित करने का आह्वान किया,ताकि वे स्वास्थ्य क्षेत्र की नई चुनौतियों के लिए व्यावहारिक और नवाचारी समाधान विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय का फार्मासिस्ट केवल दवाओं के वितरण तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रो.फारुख ने विद्यार्थियों को अनुकूलनशील,तकनीकी रूप से दक्ष और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को फार्मासिस्ट्स शपथ भी दिलाई,जिसके माध्यम से नैतिक आचरण,व्यावसायिक प्रतिबद्धता और समाजसेवा के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दोहराया गया। कार्यक्रम में प्रो.अजय नामदेव ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान की समृद्ध विरासत और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने भारतीय परंपरा में औषधीय वनस्पतियों और उपचार पद्धतियों के प्राचीन ज्ञान का उल्लेख करते हुए रामायण प्रसंग के माध्यम से संजीवनी बूटी का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक औषधीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है,लेकिन आधुनिक समय में आवश्यकता इस बात की है कि इस ज्ञान का वैज्ञानिक अनुसंधान,परीक्षण और प्रमाणीकरण आधुनिक अनुसंधान विधियों के माध्यम से किया जाए। इससे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सार्थक सेतु तैयार किया जा सकता है। प्रो.नामदेव ने अपने वक्तव्य में स्थानीय ज्ञान का वैश्वीकरण और वैश्विक तकनीकों का स्थानीयकरण की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़कर ऐसे स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जिनकी प्रासंगिकता व्यापक स्तर पर हो। विश्व फार्मासिस्ट्स दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रचनात्मक और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इनमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां,रंगोली,पोस्टर प्रस्तुति तथा रील-निर्माण प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को फार्मास्युटिकल विज्ञान से जुड़े विषयों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के साथ-साथ अपनी संवाद क्षमता,कल्पनाशीलता और तकनीकी कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिला। छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतिभाग करते हुए कार्यक्रम को जीवंत और आकर्षक बना दिया। सभी छात्र-केंद्रित गतिविधियां डॉ.गौरव जोशी की देखरेख में संपन्न हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों को कार्यक्रम की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्यों डॉ.विजय ज्योति कुमार,डॉ.नितिन सती,डॉ.अजय सेमल्टी,डॉ.मुकेश मैठाणी,डॉ.मनोज गोयल,डॉ.राम साहू,डॉ.सोमेश थपलियाल,डॉ.भूपिंदर कुमार एवं डॉ.जयंत कुमार सहित शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन छात्रा आशी चौधरी एवं वरुण कुमार ने किया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए समारोह को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ.गौरव जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य अतिथि,सभी वक्ताओं,संकाय सदस्यों,शोधार्थियों,छात्र-छात्राओं और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में व्यावसायिक प्रतिबद्धता,रचनात्मकता,नवप्रवर्तन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व फार्मासिस्ट्स दिवस का यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट्स की भूमिका निरंतर व्यापक होती जा रही है। नवाचार,आधुनिक तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,साक्ष्य-आधारित व्यवहार और समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय से फार्मेसी क्षेत्र को नई दिशा दी जा सकती है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग का यह आयोजन विद्यार्थियों को इसी बदलते परिदृश्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।
