Saturday 09/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
मसूरी में फ्लैशलाइट और हूटर लगाकर वीआईपी रौब झाड़ना पड़ा भारी, मसूरी पुलिस ने सीज की कारमसूरी,पर्यटन सीजन के बीच मसूरी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत नियम तोड़कर वीआईपी रौब गांठने वालों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बुधवार की देर षाम को मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने लाल-नीली फ्लैशलाइट, हूटर और काले शीशों वाली एक लग्जरी कार को पकड़कर सीज कर दिया।जानकारी के अनुसार कोतवाली मसूरी पुलिस लाइब्रेरी चौक पर सघन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान कैंपटी रोड की ओर से एक काले रंग की मारुति सियाज कार ( आरजे 45-सीवी-6666) फ्लैशलाइट जलाते हुए तेज रफ्तार में मसूरी की ओर आती दिखाई दी। कार पर लाल-नीली बत्ती और हूटर लगा होने से पुलिस को संदेह हुआ, जिस पर वाहन को तुरंत रोक लिया गया।पुलिस पूछताछ में चालक ने खुद को केंद्रीय मंत्रालय का अधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों पर प्रभाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब उससे वाहन के वैध दस्तावेज और ड्राइविंग लाइसेंस मांगा गया तो वह कोई मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। जांच में यह भी सामने आया कि चालक चप्पल पहनकर वाहन चला रहा था और कार पर अवैध काली फिल्म भी लगी हुई थी।सख्ती से पूछताछ करने पर चालक ने स्वीकार किया कि उसने जाम और टोल टैक्स से बचने तथा रास्तों में वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए वाहन पर फ्लैशलाइट और हूटर लगाया था। इसके बाद पुलिस ने मौके पर ही हूटर और फ्लैशलाइट उतरवाकर वाहन को सीज कर दिया।मसूरी कोतवाल देवेन्द्र चौहान पुलिस ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर ऑपरेशन प्रहार के तहत पूरे जनपद में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने, फर्जी वीआईपी कल्चर दिखाने और कानून व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।पर्यटन सीजन में मसूरी में बढ़ते ट्रैफिक और वीआईपी कल्चर के बीच पुलिस की इस कार्रवाई को आम लोगों ने भी सराहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग लाल-नीली बत्ती और हूटर लगाकर नियमों को ताक पर रख देते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी होती है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।मसूरी में षौच के दौरान 100 मीटर गहरी खाई में गिरा युवक, मसूरी पुलिस और फायर टीम ने रात में चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन  पर्यटन नगरी मसूरी में मंगलवार देर रात बड़ा हादसा टल गया, जब धनोल्टी रोड पर एक युवक अचानक करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, फायर सर्विस और 108 एंबुलेंस की टीम ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर घायल युवक को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार बुधवार की देर रात करीब 12 बजे एक व्यक्ति ने मसूरी पुलिस को सुचना दी कि वुड स्टॉक स्कूल से आगे धनोल्टी रोड पर एक व्यक्ति सड़क से नीचे खाई में गिर गया है। सूचना मिलते ही कोतवाली मसूरी पुलिस आपदा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। वहीं फायर सर्विस मसूरी और 108 एंबुलेंस की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। अंधेरी रात और दुर्गम खाई के बावजूद पुलिस और फायर कर्मियों ने रस्सियों व अन्य आपदा उपकरणों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया और करीब 100 मीटर नीचे गिरे युवक को बाहर निकाला। घायल युवक की पहचान नरेश पुत्र हुकम सिंह निवासी सिविल रोड, रावत मेडिकल स्टोर मसूरी, उम्र 32 वर्ष के रूप में हुई। रेस्क्यू के बाद युवक को तुरंत 108 एंबुलेंस से सिविल अस्पताल मसूरी पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर गंभीर चोट होने पर पांच टांके लगाए। सूचना मिलने पर युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। प्राथमिक उपचार के बाद युवक को परिजन अपने साथ घर ले गए।पुलिस जांच में सामने आया कि युवक सड़क किनारे लघुशंका करने के दौरान संतुलन बिगड़ने से खाई में गिर गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस, फायर सर्विस और 108 टीम के त्वरित रेस्क्यू अभियान की सराहना की है, जिसकी बदौलत युवक की जान बच सकी।9 करोड़ की मसूरी माल रोड बदहाल, मोती लाल नेहरू मार्ग की सडक में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क’ , पूव ्रपालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल ने पीडब्लूडी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप  पर्यटन नगरी मसूरी की बदहाल सड़कों को लेकर पूर्व पालिका अध्यक्ष ओपी उनियाल ने लोक निर्माण विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने माल रोड और मोतीलाल नेहरू मार्ग की खराब हालत को लेकर विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।पत्रकारों से वार्ता करते हुए ओपी उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के प्रयासों से करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से माल रोड का सौंदर्यीकरण और डामरीकरण कराया गया था, लेकिन विभागीय इंजीनियरों की लापरवाही के चलते आज माल रोड की हालत फिर बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होते ही करीब दो किलोमीटर लंबी माल रोड पर कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन रही है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। सड़क किनारे बनी नालियां मलबे और गंदगी से पटी पड़ी हैं, जबकि पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है।ओपी उनियाल ने मोतीलाल नेहरू मार्ग की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से हुए डामरीकरण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि छह महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह टूट गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब यह समझना मुश्किल है कि “सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।” उन्होंने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि खराब निर्माण कार्यों से सरकार और जनप्रतिनिधियों की छवि भी प्रभावित हो रही है। पूर्व पालिका अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी देहरादून से मांग की कि माल रोड और मोतीलाल नेहरू मार्ग पर हुए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की रिकवरी की जाए।दो किश्तें बकाया होने पर फाइनेंस कंपनी पर वाहन कब्जाने का आरोप, कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन रुद्रपुर। खेड़ा निवासी युवा व्यापारी इरफान अली ने चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इरफान अली के अनुसार उन्होंने लगभग दो वर्ष पूर्व कंपनी से डिजायर कार फाइनेंस करवाई थी। पिछले दिनों उनके बेटे को स्पाइनल कॉर्ड से संबंधित गंभीर बीमारी होने के कारण उपचार में करीब 15 लाख रुपये खर्च हो गए, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और वाहन की दो किश्तें समय पर जमा नहीं हो सकीं।आरोप है कि 3 मई को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने हरिद्वार में वाहन को रोककर उसमें सवार यात्रियों को बीच रास्ते उतार दिया तथा गाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद जब इरफान अली रुद्रपुर स्थित कंपनी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से वार्ता की, तो कंपनी कर्मचारियों द्वारा दूसरी गाड़ी, जिसे कंपनी ने नहीं रोका था, उसकी भी किश्तों का हिसाब जोड़ते हुए अतिरिक्त चार्ज लगाए जाने की बात कही गई।इरफान अली का कहना है कि उन्होंने बकाया दो किश्तें जमा करने की बात कही, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया। इसके विरोध में सोमवार को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने ढोल बजाकर कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की।मामले की गंभीरता को देखते हुए आवास विकास चौकी पुलिस एवं एलआईयू की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। पुलिस प्रशासन द्वारा चोलामंडलम कंपनी के रीजनल मैनेजर शिवराज ब्रिज से फोन पर वार्ता कराई गई, जिसमें बुधवार सुबह मामले के निस्तारण का आश्वासन दिया गया। इसके बाद धरना-प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।धरना-प्रदर्शन में मोहन खेड़ा, संजय जुनेजा, सौरभ राज बेहड़, परवेज कुरेशी, उमर अली, मोनिका ढाली, मोहम्मद अशफाक अंसारी, रणजीत सिंह राणा, अनंत बिश्नोई, मारूफ, रेहान, ताहिर, हैरी पन्नू, समप्रीत ग्रोवर, गौरव कुमार, गोविंद सिंह, सरजू सिंह सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।रीजनल पार्टी ने भाजपा को बादाम भेजकर याद दिलाया लोकायुक्त का वादाश्री जगरनाथ भक्त शिरोमणि मां कर्मा देवी की प्रदेशध्यक्ष बीना साहू ने स्कूल के बच्चों को बांटे ग्लूकोन डी के पैकेटमुख्यमंत्री की घोषणा को धरातल पर उतरने की कवायद शुरूसरकारी जमीन पर ‘अवैध मजार’ का खेल बेनकाब15 साल में नहीं बदली गांवों की तस्वीर, जनता बदलाव चाहती है: सुमेंद्र सिंह बोहरा  कांग्रेस नेता सुमेन्द्र सिंह बोहरा इन दिनों मसूरी विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे हैं। ग्राम गढ़, बुरांशखंडा, पन्याली और सरोना न्याय पंचायत क्षेत्र में पहुंचकर उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और क्षेत्र की बदहाल सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।ग्रामीणों से बातचीत के दौरान सुमेंद्र सिंह बोहरा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और ग्रामीणों को शहर तक आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता वर्षों से सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।उन्होंने वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेष जोषी पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से लगातार विधानसभा जीतने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों की सड़कें आज भी बदहाल हैं, जिससे लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।बोहरा ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी उन्हें मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने का अवसर देती है और जनता का समर्थन मिलता है, तो वह अगले पांच वर्षों में क्षेत्र में सड़क निर्माण, अस्पतालों के विकास और स्कूलों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि गांवों का समग्र विकास करना है।उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की जनता अब बदलाव चाहती है और विकास के मुद्दों पर गंभीर नेतृत्व की तलाश में है। जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा।
राज्य

विकास की मृगतृष्णा में उलझा पहाड़-सपनों के राज्य की हकीकत अब भी अधूरी–डाॅ.राजेन्द्र कुकसाल


श्रीनगर गढ़वाल। पच्चीस वर्ष पूर्व जब उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया,तब पहाड़ के जनमानस की आंखों में उम्मीद की चमक थी-यह विश्वास था कि अब विकास उनके द्वार तक पहुंचेगा,गांवों में रौनक लौटेगी और युवाओं को पलायन नहीं करना पड़ेगा। लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह सपना विकास की मृगतृष्णा बनकर रह गया है। राज्य में योजनाओं का अंबार है, घोषणाओं की भरमार है,और रिपोर्टों में विकास छलकता दिखाई देता है-मगर धरातल पर गांव अब भी वीरान हैं,खेत परती पड़े हैं और सरकारी मशीनें जंग खा रही हैं। उत्तराखंड के सरकारी विभागों की योजनाओं की सूची सुनिए-पिरूल से रोजगार,पिरूल से ऊर्जा,जैविक खाद,मशरूम उत्पादन,सोलर एनर्जी,लैमन ग्रास,जिरेनियम ऑयल,जैट्रोफा बायो डीज़ल,रेशम उत्पादन,फूलों की खेती,सेब मिशन,जड़ी-बूटी विकास,बांस व भीमल रेशा योजना,चाय बागान,फूड प्रोसेसिंग,एग्रीविजन ग्रोथ सेंटर,जैविक खेती,जीरो बजट खेती,हाइड्रोफोनिक खेती,टिशूकल्चर,जल संवर्धन,पर्यटन प्रदेश,आयुष प्रदेश,नाम अनगिनत हैं,दावे भव्य हैं-पर नतीजे नगण्य। योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद आम जन वहीं खड़ा है,जहां 25 वर्ष पहले खड़ा था। राज्य में योजनाओं की कमी नहीं है,कमी है ईमानदार क्रियान्वयन की। जब तक बजट जारी रहता है,शोर सुनाई देता है-योजनाएं बंद होते ही बस बोर्ड और टूटी मशीनें बचती हैं। विकास के नाम पर विदेश भ्रमण,होर्डिंग्स,जागरूकता गोष्ठियां,थ्री-स्टार होटल मीटिंग्स,बायर्स-सेलर्स मीट खूब होती हैं,लेकिन जिन किसानों के नाम पर यह सब होता है,वे आज भी पिरूल,लकड़ी और श्रम से जीवन चला रहे हैं। प्रदेश के 16,793 गांवों में से 3,000 से अधिक गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। ढाई लाख से अधिक घरों पर ताले लटक रहे हैं,और जो कभी आंगन से आवाज़ें आती थीं,वहां अब सन्नाटा पसरा है। सरकारें आंकड़ों के खेल में व्यस्त हैं-मगर पहाड़ के गांवों में विकास शब्द अब व्यंग्य बन चुका है। फर्जी आंकड़ों के आधार पर कई योजनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार तक मिले हैं। कई स्वयंसेवी संस्थाएं (एनजीओ) झूठे प्रमाणपत्रों के दम पर सम्मान बटोर रही हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि योजनाओं के नाम पर राज्य के नेता,अफसर,सप्लायर और एनजीओ संचालक ही आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं-जनता वहीं की वहीं। राज्य में विकास योजनाओं के नाम पर जैट्रोफा बायोफ्यूल,ढैंचा बीज,लहसुन-अदरक बीज,पॉलीहाउस और कोल्ड स्टोरेज घोटालों जैसी कई घटनाएं उजागर हुईं। जांचें भी हुईं,कुछ नाम सामने आए,मगर किसी पर प्रभावी दंडात्मक कार्यवाही आज तक नहीं हुई। हर बार जांच रिपोर्ट फाइलों में दफन हो जाती है और अगली सरकार वही गलती दोहराती है। राज्य बनने के पीछे सबसे बड़ा तर्क था कि अब भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं बनेंगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी योजनाओं का प्रारूप उत्तर प्रदेश कालीन ढांचे पर ही चलता है। फाइलों में सस्टेनेबल डेवलपमेंट और जैविक प्रदेश के शब्द लिखे हैं,पर धरातल पर किसानों के लिए सिंचाई, बाजार और मूलभूत सुविधाएं अब भी सपना हैं। हर सरकार के साथ कुछ पुराने तथाकथित बुद्धिजीवी सलाहकार बदलते नहीं। वे हर सरकार में जगह बना लेते हैं,चाहे विषय उनका हो या नहीं।
इन्हीं की सलाह पर नीतियां बनती हैं और परिणाम हमेशा वही निकलता है-ढांचा वही,दिशा वही,और परिणाम भी वही। आज आवश्यकता इस बात की है कि चल रही योजनाओं का ईमानदारी से स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए। राज्य की भौगोलिक व सामाजिक वास्तविकताओं के अनुसार योजनाओं में सुधार लाया जाए और क्रियान्वयन में पारदर्शिता स्थापित की जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में विकास शब्द सिर्फ सरकारी रिपोर्टों और विज्ञापनों तक सीमित रह जाएगा और आम जन,अपनी उम्मीदों के साथ, विकास की मृगतृष्णा में जीता रहेगा। उत्तराखंड राज्य स्थापना रजत जयंती वर्ष 2025 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। लेकिन यह भी समय है आत्ममंथन का-क्या हम सच में उन सपनों के राज्य में जी रहे हैं, जिसका वादा 25 वर्ष पहले किया गया था।

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