Friday 26/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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उत्तराखण्ड

अलकनन्दा हाइड्रोपावर कंपनी ने फिश हैचरी गढ़वाल विश्वविद्यालय को सौंपी

श्रीनगर गढ़वाल। अलकनन्दा हाइड्रोपावर कंपनी द्वारा स्थापित अत्याधुनिक फिश हैचरी अब औपचारिक रूप से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग को सौंप दी गई है। इससे न केवल वैज्ञानिक शोध को नई दिशा मिलेगी,बल्कि उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठित राज्य मछली महासीर (टॉर प्यूटिटोरा) के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। इस महत्वपूर्ण हस्तांतरण के साथ अब फिश हैचरी का संपूर्ण संचालन एवं प्रबंधन गढ़वाल विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी में आ गया है। हैचरी में वर्तमान में महासीर मछली का पालन किया जा रहा है,जिसे आईयूसीएन द्वारा वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मछली हर वर्ष मैदानी नदियों से पहाड़ी जलधाराओं की ओर प्रजनन हेतु प्रवास करती है,लेकिन प्राकृतिक आवास में कमी आने से इसकी संख्या लगातार घट रही है। गढ़वाल विश्वविद्यालय का जंतु विज्ञान विभाग लंबे समय से पहाड़ी नदियों में महासीर की संख्या बढ़ाने तथा उसके संरक्षण पर वैज्ञानिक शोध कर रहा है। फिश हैचरी का प्रबंधन विश्वविद्यालय को मिलने से अब अनुसंधान,संवर्धन तथा जैव-विविधता संरक्षण के कार्य और प्रभावी रूप से संचालित होंगे। 2015 में हुआ था निर्माण
अलकनन्दा हाइड्रोपावर कंपनी ने वर्ष 2015 में इस हैचरी का निर्माण कराया था और तब से इसका रखरखाव भी कंपनी द्वारा ही किया जा रहा था। सोमवार को चौरास परिसर स्थित जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित बैठक के दौरान कंपनी ने इसे औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किया। बैठक में हुई महत्वपूर्ण चर्चा हस्तांतरण बैठक में अलकनन्दा हाइड्रोपावर कंपनी की ओर से महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अरुण कुमार सिंह उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से जंतु विज्ञान विभाग की प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो.मन्जु प्रकाश गुसाई,प्रो.ओम प्रकाश गुसाईं,प्रो.दीपक सिंह,फिश हैचरी के संयोजक प्रो.आर.एस.फर्त्याल,विजयानंद बहुगुणा,डॉ.आनन्द कुमार,डॉ.जीतेंद्र सिंह राणा,अजय भूषण आदि मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि हैचरी को अनुसंधान,प्रशिक्षण और संरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा,जिससे स्थानीय युवाओं और शोधार्थियों को भी रोजगारपरक अवसर मिल सकें। संरक्षण को नया आधार विशेषज्ञों का कहना है कि इस हस्तांतरण के बाद महासीर संरक्षण पर केंद्रित शोध को गति मिलेगी। पहाड़ी नदियों की जैव विविधता बचाने एवं प्राकृतिक चक्र को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अलकनन्दा हाइड्रोपावर कंपनी की यह पहल निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है,जो राज्य की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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