Wednesday 11/ 02/ 2026 

Bharat Najariya
सीएम के कार्यक्रम को भव्य और दिव्य बनाने के लिए महापौर ने जिला प्रशासन के साथ बनाई रूपरेखाजिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मिलने वाली निशुल्क सेवाओं की थी जानकारीगदरपुर । मा०सचिव महोदय,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर के अनुपालन में आदेश संख्या-108/2025-26 को प्रात 10.00 बजे से 11:30 बजे तक आदर्श कालौनी वार्ड नं 5 विषय-डिजिटल न्याय पहलू को सुदृढ़ बनाना,ई टू कॉपी मॉड्यूल ई सेवा केंद्र के सम्बन्ध में जागरूकता कार्यक्रम किया गया।एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मिलने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी,स्थायी लोक अदालत,नालसा टोल फ्री नंबर 15100, राष्ट्रीय साइबर हैल्पलाईन नं1930 के बारें में जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता राकेश कुमार सुखीजा एवं पराविधिक कार्यकर्ता राजकुमारी,संगीता सरदार एवं गोपाल सिंह गौतम द्वारा जानकारी देकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में ग्रामीणों की संख्या 40 रही।ग्राम डलपुरा में इंटरलॉकिंग टाइल रोड निर्माण की स्वीकृतिराजकीय प्राथमिक विद्यालय कोपा में ‘नालसा बच्चों के लिए मैत्रीपूर्ण विधि सेवाएं योजना 2024’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन​विश्वकर्मा मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन:भाईचारे और अमन शांति के लिए की प्रार्थना:स्लाग : ssp का सड़कों का किया जायजासितारगंज के श्री सनातन धर्म मंदिर में तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन रखा गयाडेमोग्राफी व जनसांख्यिकी बदलाव पर जिलाधिकारी को सौंपा पत्र।विधायक सरिता आर्या ने नाबालिग पीड़ित से की मुलाकात
राज्य

रूद्रपुर, 10 फरवरी श्रमिक संयुक्त मोर्चा, उधम सिंह नगर के बैनर तले श्रमिक नेताओं ने आज रूद्रपुर के नैनी व्यू होटल में प्रेस वार्ता कर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग पर हो रही 12 फरवरी की हड़ताल के सम्बंध में जानकारी दी। प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार मजदूर वर्ग को पूंजीपतियों का गुलाम बना देना चाहती है। पूर्व में कुछ पूंजीपतियों द्वारा सुझाव दिया गया था कि मजदूर को हफ्ते में 48 घंटे फैक्ट्री में काम करने के बजाय 70 से 90 घंटे काम करना चाहिये। उन पूंजीपतियों की बातों को मानते हुए सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर नये श्रम कोड लागू कर दिए। इन श्रम कोड्स के माध्यम से मालिक मजदूरों से कम वेतन पर ज्यादा घंटे काम लेगा। इन श्रम कोड्स को वापस लेने की मांग पिछले 5 सालों से श्रमिक लगातार कर रहे थे। परंतु सरकार की काॅरपोरेटपरस्त मंशा के कारण नवम्बर 2025 से ये श्रम संहिताएं बेशर्मी के साथ लागु कर दी गयी। दिनेश तिवारी ने कहा कि इन लेबर कोड्स को लागू करने के खिलाफ 12 फरवरी को हड़ताल आहूत है जिसमें सिडकुल की दर्जनभर यूनियनें हड़ताल पर जायेंगी। जिन्होंने अपने प्रबंधन को भी नोटिस दे दिया है। इसके अलावा आशा वर्कर्स व अन्य महिला स्कीम वर्कर्स भी हड़ताल बर रहेंगे। बैंक, बीमा क्षेत्र की यूनियनें भी

हड़ताल पर रहेंगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की है। उधम सिंह नगर जिले के मजदूर-किसान गांधीपार्क में 10 बजे से इकट्ठा होंगे और जनसभा करेंगे।

ट्रेड यूनियन एक्टू के राष्ट्रीय सचिव के.के.बोरा ने कहा कि यह हड़ताल कार्रवाई एक बहुत ही नाजुक स्थिति में हो रही है, जब केंद्र सरकार, ट्रेड यूनियनों को नियंत्रित करने और कमजोर करने और भारतीय श्रमिक वर्ग आंदोलन को पूंजी के हमले के सामने निहत्था करने के लिए, चार श्रम संहिताएं लेकर आई है।

उन्होंने कहा कि श्रम संहिताएं कानून की उचित प्रक्रिया के बिना, हितधारकों के साथ कोई परामर्श किए बिना, भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए बिना, अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों की अवहेलना करते हुए लाई गईं। जिसके लिए भारत एक राष्ट्र राज्य के रूप में हस्ताक्षरकर्ता है। संहिताओं को संसद में अपने क्रूर बहुमत के चलते पारित किया गया और तीन संहिताओं के मामले में तो पूरी तरह से विपक्ष की अनुपस्थिति में और कोविड-19 अवधि के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पारित किया गया, जिसने प्रदर्शनों को रोक दिया था। नोटिफाइड लेबर कोड और ड्राफ्ट नियम, सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने, हड़ताल का अधिकार छीनने, लगभग 70 प्रतिशत फैक्ट्रियों को लेबर कानून के दायरे, रेगुलेशन और मालिकों की जिम्मेदारियों से बाहर करने, मजदूरों को मालिकों की दया पर छोड़ने, ज्यादातर मजदूरों को ऑक्यूपेशनल सेफ्टी और सोशल सिक्योरिटी की सुरक्षा से बाहर करने के लिए हैं। ये सुलह/निर्णय प्रक्रियाओं के जरिए मौजूदा अधिकारों और मजदूरी की सुरक्षा को लगभग खत्म कर देंगे। मजदूरी की परिभाषा में भी बदलाव का प्रस्ताव है, ट्रेड यूनियन एक्ट को खत्म किया जाना है और प्रस्तावित कोड यूनियन बनाने को मुश्किल/असंभव बना देगा। जिससे मनमाने ढंग से डी-रजिस्ट्रेशन और डी-रिकग्निशन होगा, कलेक्टिव ट्रेड यूनियन गतिविधियों के खिलाफ बदले की भावना से सजा देने वाली कार्रवाई होगी और मालिकों को अपनी मर्जी से अपने कानूनी दायित्वों का उल्लंघन करने की छूट मिलेगी।

इंकलाबी मजदूर यूनियन के कोषाध्यक्ष दिनेश चन्द्र ने कहा कि कुल मिलाकर, लेबर कोड सरकार द्वारा मजदूरों और उनके ट्रेड यूनियनों पर गुलामी की शर्तें थोपने, उनके कॉर्पोरेट मालिकों को मजदूरों, किसानों और आम लोगों पर अपनी लूट जारी रखने में मदद करने के लिए सोच-समझकर डिजाइन किए गए हैं।

सरकार भारतीय और विदेशी मूल के बड़े कॉर्पोरेट्स के फायदे के लिए सभी रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं जैसे रेलवे, बंदरगाह और डॉक, कोयला खदानों, तेल, स्टील, रक्षा, सड़क मार्ग, हवाई अड्डे, बैंक, बीमा, दूरसंचार, डाक, परमाणु ऊर्जा, बिजली उत्पादन और आपूर्ति आदि के निजीकरण और बिक्री का अपना एजेंडा जारी रखे हुए है, जिससे स्वदेशी औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ रही है। बजट 2026-2027 भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। बैंकों में सुधार के लिए उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का साफ संकेत है।

प्रेस वार्ता में भाकपा (माले) जिला सचिव ललित मटियाली, इंट्रार्क मजदूर संगठन के नेता सौरभ, सीएसटीयू नेता धीरज जोशी, ऑटोलाइन एम्प्लाइज यूनियन की ओर से जीवन व प्रकाश मेहरा, ऐरा श्रमिक संगठन से भरत जोशी , आर एम एल एम्पलाई यूनियन के प्रकाश नेगी व कमलेश कार्की मौजूद थे।

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