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चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा भर्ती की आयु सीमा घटाने पर समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने जताई कड़ी आपत्ति; पूछा— ‘कहाँ गया युवाओं को रोजगार देने का वायदा?’चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा सरकारी भर्तियों में अधिकतम आयु सीमा को 37 वर्ष से घटाकर 27 वर्ष करने के फैसले पर राजबीर सिंह भारतीय (सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट, कार्यालय महाधिवक्ता, हरियाणा) ने गहरा रोष प्रकट किया है। उन्होंने इस कदम को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए प्रशासन और सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।प्रमुख मांगें और उठाए गए सवाल:अंधकार में भविष्य: श्री भारतीय ने कहा कि हजारों युवा पिछले कई वर्षों से 37 वर्ष की आयु सीमा को आधार मानकर सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे। अचानक आयु सीमा में 10 साल की कटौती करने से ये अभ्यर्थी परीक्षा में बैठने से पहले ही ‘ओवरएज’ हो गए हैं। उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया है।रोजगार के वायदे पर सवाल: उन्होंने सरकार को घेरते हुए पूछा कि हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का जो वायदा किया गया था, वह कहाँ गया? एक तरफ रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ उम्र की पाबंदी लगाकर युवाओं को दौड़ से बाहर किया जा रहा है।सेंट्रल सर्विस रूल्स का हवाला गलत: राजबीर सिंह भारतीय ने तर्क दिया कि केंद्रीय सेवा नियम लागू करना युवाओं के हितों की बलि देकर नहीं होना चाहिए। यदि भर्ती प्रक्रिया में देरी प्रशासन की ओर से हुई है, तो उसकी सजा युवाओं को क्यों दी जा रही है?विशेष भर्ती अभियान की मांग: उन्होंने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि प्रभावित युवाओं के लिए पुरानी 37 वर्ष की सीमा के तहत एक विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए, ताकि जिन उम्मीदवारों ने सालों तक इंतजार किया है, उन्हें अपना भविष्य सुधारने का एक अंतिम अवसर मिल सके।युवाओं के साथ खड़े रहने का संकल्प:समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लिया या युवाओं को उचित छूट नहीं दी, तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने कहा, “जब तक युवाओं को उनका हक नहीं मिल जाता, हम शांत नहीं बैठेंगे। देश का युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और प्रशासन की यह बेरुखी उनके भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है।”

