मातृ सुरक्षा पर फोकस-पौड़ी में घर घर पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी में मातृ एवं शिशु सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ दिया है। शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर गर्भवती महिलाओं की जांच,परामर्श और निरंतर मॉनिटरिंग कर रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि जनपद के थलीसैंण,पोखड़ा,एकेश्वर और खिर्सू विकासखंडों के विभिन्न दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य टीमों द्वारा सघन गृह भ्रमण अभियान चलाया गया। इस दौरान आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और उपकेंद्रों में कुल 56 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। साथ ही महिलाओं और उनके परिजनों को घर पर प्रसव के जोखिमों के प्रति जागरूक करते हुए संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल से अब तक 627 गर्भवती महिलाओं का गृह भ्रमण कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा चुकी है। इस दौरान महिलाओं को समय-समय पर जांच,आवश्यक अल्ट्रासाउंड,पोषण और स्वास्थ्य देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में 108 एम्बुलेंस सेवा,प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाने के लिए 102 सेवा तथा स्वास्थ्य परामर्श हेतु 104 टोल फ्री सेवा का लाभ उठाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृत्व सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी आमजन तक पहुंचाई जा रही है,जिससे अधिक से अधिक महिलाएं इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी ने विशेष रूप से बताया कि थलीसैंण विकासखंड में अपेक्षाकृत अधिक गृह प्रसव की स्थिति को देखते हुए वहां अतिरिक्त 3 एम्बुलेंस सेवाएं तैनात की गई हैं और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों,एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं के दैनिक फॉलोअप और सतत निगरानी के निर्देश भी जारी किए गए हैं। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में महिला चिकित्साधिकारी,एएनएम,आशा,सीएचओ और अन्य फील्ड कर्मियों की संयुक्त टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंच सकें। स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान न केवल मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है,बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा बढ़ाने का भी सशक्त प्रयास साबित हो रहा है।
