उत्तराखंड की लोकधुनों को नया मंच-एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में नरेंद्र संगीत सप्ताह में देशभर से जुटे कलाकार

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई है। लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र द्वारा आयोजित नरेन्द्र संगीत सप्ताह का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ,जिसमें लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी के अद्वितीय योगदान को केंद्र में रखते हुए प्रदेश की लोकधुनों की अनुगूंज पूरे परिसर में गूंज उठी। यह आयोजन कई मायनों में खास है। पहली बार गढ़वाली लोकसंगीत के शिखर पुरुष रहे नेगी के पांच दशकों से अधिक लंबे सृजनात्मक सफर को एक समर्पित सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मंच दिया गया है। देशभर से 80 से अधिक प्रतिभागियों ने इस आयोजन में भागीदारी के लिए अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं,जो इस सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में अपने सुरों का जादू बिखेरेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह ने इसे लोक-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने कहा कि नेगी जैसे कलाकार केवल गायक नहीं बल्कि संस्कृति के संवाहक होते हैं,जिनकी रचनाओं में पहाड़ की आत्मा बसती है। नई पीढ़ी उनके गीतों से प्रेरणा ले रही है,जो इस आयोजन की सार्थकता को और मजबूत बनाता है। कुलपति ने लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र की सराहना करते हुए इसे भविष्य में संगीत की प्रतिष्ठित संस्थाओं के समकक्ष स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य राज्यों में सांस्कृतिक परंपराएं संस्थागत रूप ले चुकी हैं,उसी तरह उत्तराखण्ड में भी इस केन्द्र को लोकधरोहर का प्रमुख मंच बनाना होगा। इस अवसर पर स्वयं गढ़गौरव नरेन्द्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। नेगी ने अपने लोकप्रिय गीत ठंडो रे ठंडो,मेरा पाड़ै की हवा ठंडी पाणी ठंडो की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। केन्द्र के संस्थापक डॉ.डी.आर.पुरोहित ने इस आयोजन को एक नई सांस्कृतिक परंपरा की शुरुआत बताते हुए कहा कि जैसे बंगाल में रवीन्द्र संगीत की परंपरा है,वैसे ही उत्तराखण्ड में नेगी के गीतों की पहचान है। विश्वविद्यालय ने इस पहल के माध्यम से लोकसंगीत को एक नई दिशा देने का कार्य किया है। कार्यक्रम के पहले दिन विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सतपुली,ऋषिकेश,देहरादून और चौंदकोट समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति दी। खास बात यह रही कि इस मंच ने उन उभरते कलाकारों को भी अवसर दिया,जिन्हें पहली बार सार्वजनिक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक डॉ.संजय पाण्डेय और निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि बिपिन बलूनी,कुलसचिव प्रोफेसर वाई.एस.रैवानी,अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं,डीन प्रो.मोहन सिंह पंवार सहित बड़ी संख्या में संस्कृतिकर्मी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। नरेन्द्र संगीत सप्ताह न केवल एक आयोजन है,बल्कि यह उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है-जहां परंपरा,प्रतिभा और पहचान का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
