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मसूरी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 55 मामलों का निस्तारण, साढ़े 34 लाख रुपये के चैक बाउंस दो बड़े मामलों में हुआ समझौता मसूरी न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण किया गया। लोक अदालत में करीब 55 मामलों को सुना गया और उनका विधिवत समाधान कराया गया। इस दौरान कई पक्षकारों ने आपसी समझौते के जरिए वर्षों पुराने विवादों को समाप्त किया।लोक अदालत की अध्यक्षता कर रहे मनोज सिंह राणा न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज मसूरी ने बताया कि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पूरे देश में समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है।साढ़े 34 लाख रुपये के दो बड़े मामलों में हुआ समझौतासिविल जज मनोज सिंह राणा ने बताया कि लोक अदालत में मुख्य रूप से कंपाउंडेबल मामलों का निस्तारण किया जाता है। इनमें विशेष रूप से नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के मामले, क्रिमिनल कंपाउंडेबल केस और मोटर व्हीकल एक्ट के चालान शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार आयोजित लोक अदालत में 55 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें कुछ बड़े और महत्वपूर्ण मामले भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि दो प्रमुख मामलों में लगभग साढ़े 34 लाख रुपये चैकं बाउंस के केस का समझौता कराया गया, जो लोक अदालत की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।“लोक अदालत से समय और धन दोनों की बचत”मनोज सिंह राणा ने कहा कि कई मामलों में दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन यदि वही मामले नियमित अदालतों में चलते रहते हैं तो प्रक्रिया काफी लंबी हो जाती है। इससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है।उन्होंने कहा कि लोक अदालत में दोनों पक्ष बातचीत और समझौते के जरिए विवाद सुलझा लेते हैं, जिससे न केवल अदालतों का बोझ कम होता है बल्कि पक्षकारों के बीच का मनमुटाव भी समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था को सरल और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।लोगों में बढ़ रही जागरूकतासिविल जज मनोज सिंह राणा ने बताया कि अब लोगों में लोक अदालत को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन मामलों का समझौते के आधार पर निस्तारण संभव है, वे लोक अदालत में आसानी से सुलझ जाते हैं और इससे लोगों को काफी राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोग भी इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हर महीने या हर दूसरे महीने विभिन्न क्षेत्रों में लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है।त्वरित न्याय की दिशा में प्रभावी पहलमनोज सिंह राणा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत को न्यायपालिका की एक ऐसी पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण करना और लोगों को सस्ता एवं सरल न्याय उपलब्ध कराना है। मसूरी में आयोजित लोक अदालत में भी बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर अपने मामलों का समाधान कराया और इस पहल की सराहना की। इस मौके पर कैलाष कन्याल, सुमित निराला, राकेष कुमार पांडेख् सुमित सिंह बिश्ठ सहित कई अधिवक्ता मौजूद थे।

