Thursday 06/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

बाल सुरक्षा और जागरूकता की ओर बड़ा कदम-जीआईसी कपरोली में 190 विद्यार्थियों को दिए गए अधिकार और सुरक्षा के मंत्र


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। वर्तमान समय में बच्चों की सुरक्षा,जागरूकता और अधिकारों को लेकर समाज में संवेदनशील वातावरण तैयार करने की दिशा में सोमवार को विकासखंड थलीसैंण स्थित राजकीय इंटर कॉलेज कपरोली में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 190 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर बाल सुरक्षा,साइबर जागरूकता,मानसिक स्वास्थ्य तथा कानूनी अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य अंकित चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल शैक्षिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि बच्चों को अपने अधिकारों,सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की जानकारी होना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूक बच्चे ही सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव बनते हैं। यदि बच्चों को समय रहते सही जानकारी मिले तो वे किसी भी प्रकार के शोषण,उत्पीड़न या साइबर अपराध से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई के एलसीपीओ निखिल डेविड ने कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम,बाल श्रम निषेध कानून,बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम एवं बाल अधिकारों से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,सम्मानजनक जीवन और संरक्षण प्राप्त करना उसका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने बच्चों को किसी भी प्रकार की हिंसा,उत्पीड़न या गलत गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में शिखा खरे ने छात्र-छात्राओं को गुड टच-बैड टच,लैंगिक संवेदनशीलता,मानसिक स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया। उन्होंने बच्चों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि इंटरनेट की दुनिया जितनी उपयोगी है,उतनी ही सावधानी की भी मांग करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि,अनजान व्यक्ति के संपर्क या मानसिक दबाव की स्थिति में तुरंत अभिभावकों और शिक्षकों को जानकारी देना जरूरी है। चाइल्डलाइन समन्वयक मोहित सिंह ने बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1098 बच्चों के लिए 24 घंटे संचालित होने वाली निःशुल्क आपातकालीन सेवा है,जहां बाल श्रम,बाल विवाह,हिंसा,भिक्षावृत्ति,उत्पीड़न या किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे किसी भी जरूरतमंद बच्चे की जानकारी भी हेल्पलाइन तक पहुंचाने में सहयोग करें। राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण के प्रबंधक अभिषेक नेगी ने निराश्रित बच्चों के पुनर्वास एवं दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने में सहयोग करें। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं भी साझा कीं,जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल और प्रभावी ढंग से समाधान किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के लिए न केवल जानकारीपूर्ण रहा,बल्कि उनमें आत्मविश्वास,सजगता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला भी साबित हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं,कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में बाल संरक्षण और सुरक्षित समाज निर्माण के लिए सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया गया।

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