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सड़क हादसे में घायल युवक की मौत, समय पर एंबुलेंस न मिलने पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल शक्तिफार्म। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को समय पर एंबुलेंस और उचित उपचार व्यवस्था नहीं मिल सकी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के प्रति लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।जानकारी के अनुसार, सितारगंज के गुरुनानक नगरी गोठा निवासी 24 वर्षीय मंजीत सिंह उर्फ बिट्टू सोमवार रात अपनी पत्नी सुखविंदर कौर के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। सिरसा-शक्तिफार्म मार्ग पर किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को निजी वाहन से शक्तिफार्म स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद सुखविंदर कौर को छोटी एंबुलेंस के माध्यम से उपजिला चिकित्सालय सितारगंज भेज दिया गया, लेकिन मंजीत सिंह की हालत गंभीर होने के बावजूद उन्हें समय पर हायर सेंटर रेफर नहीं किया जा सका।बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य केंद्र की 108 एंबुलेंस खराब थी। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि एंबुलेंस में तेल नहीं था, जिसके कारण युवक को तत्काल नहीं भेजा जा सका। दूसरी एंबुलेंस मंगाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसके पहुंचने में 30 से 40 मिनट का समय बताया गया। इस दौरान युवक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा।आखिरकार परिजन मंजीत सिंह को निजी वाहन से सितारगंज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो युवक की जान बचाई जा सकती थी। साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि एंबुलेंस लंबे समय से खराब थी तो उसे दुरुस्त कराने के लिए विभाग ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए।मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने और जनाक्रोश बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। उपजिला चिकित्सालय सितारगंज के प्रभारी डॉ. कुलदीप सिंह यादव ने शक्तिफार्म स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर मामले की जानकारी ली।पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जांच समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीपी सिंह, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किच्छा की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कनक बनौथा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शक्तिफार्म के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. दर्शन सिंह को शामिल किया गया है। एंबुलेंस से जुड़े कर्मचारियों को भी तलब किया गया है।हालांकि, घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या हर मौत के बाद केवल जांच समिति गठित कर देना ही जिम्मेदारी पूरी करना है, या फिर जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।

