तेज रफ्तार डंपर ने छीनी घर के इकलौते चिराग की जिंदगी,

फिर एक तेज रफ्तार डंपर की लापरवाही के चलते एक हंसते-खेलते घर का चिराग बुझ गया, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते इन भारी वाहनों के आगे मासूम जिंदगियां कितनी बेबस हैं। काशीपुर में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ अब आम जनता के लिए काल साबित हो रहा है, जहां आए दिन कोई न कोई परिवार अपनी जिंदगी की सबसे अनमोल पूंजी को खो रहा है। ताजा दिल दहला देने वाला वाकया गंगे बाबा रोड पर देर रात घटित हुआ, जिसने महेशपुर मदर कॉलोनी के एक ऐसे अभागे परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया, जो पहले ही किस्मत की मार झेल रहा था। हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 22 वर्षीय मासूम युवक अभिषेक यादव के सिर से माता-पिता का साया पहले ही उठ चुका था, और वह अपने भाई-बहनों का पेट पालने के लिए एक ब्लैंकेट फैक्ट्री में रात के सन्नाटे में खून-पसीना बहाकर नाइट ड्यूटी कर रहा था। किसे पता था कि रोज की तरह काम पर निकला यह कर्मठ बेटा सुबह कभी घर लौटकर ही नहीं आएगा और गंगे बाबा रोड से गुजरते वक्त एक अनियंत्रित, काल बने डंपर की चपेट में आकर उसकी सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट जाएगी। टक्कर इतनी खौफनाक थी कि अभिषेक ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया, और इस खूनी हादसे ने न सिर्फ एक जवान जिंदगी को बेरहमी से कुचल डाला, बल्कि पीछे रोते-बिलखते भाई-बहनों के सिर से उनके भाई और रक्षक का आखिरी सहारा भी हमेशा के लिए छीन लिया। घटना की सूचना मिलते ही जब पुलिस ने लहूलुहान शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, तो परिजनों के करुण क्रंदन और चीखों से पूरा इलाका दहल उठा, क्योंकि जिस बहन की शादी हो चुकी थी और जो भाई-बहन अभिषेक के सहारे अपनी जिंदगी की उम्मीदें बुन रहे थे, उन पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है जिसकी भरपाई शायद कायनात भी न कर पाए। पुलिस भले ही अब हादसे के कारणों की जांच और फरार डंपर चालक की तलाश का दावा कर रही हो, लेकिन इन सूनी सड़कों पर उड़ती धूल के बीच बिखरा अभिषेक का लहू चीख-चीख कर प्रशासन से सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक लापरवाही की इस अंधी रफ्तार में ऐसे बेगुनाह चिराग बुझते रहेंगे।
