Sunday 23/ 08/ 2026 

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बगड़ेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा बनी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प पर्व,समलौण परंपरा से रोपे बेलपत्र और रुद्राक्ष


पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। धर्म और प्रकृति का संबंध भारतीय संस्कृति में सदियों पुराना रहा है। देवालयों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान जब पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जुड़ते हैं,तो आस्था के साथ-साथ समाज को एक स्थायी और प्रेरणादायी संदेश भी मिलता है। इसी भावना को साकार करते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी पट्टी पैडुलस्यूं के ग्राम कमेड़ा स्थित झाली माली कंडारा बाजार के बगड़ेश्वर महादेव मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर समलौण पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राण-प्रतिष्ठा के पावन अवसर को चिरस्थायी और पर्यावरणीय दृष्टि से यादगार बनाने के लिए मंदिर परिसर में बेलपत्र एवं रुद्राक्ष के समलौण पौधे रोपे गए। इन पवित्र पौधों का रोपण योगेंद्र ममगाईं एवं अब्बल सिंह ने किया। धार्मिक आस्था से जुड़े इन पौधों को मंदिर परिसर में रोपित कर आयोजकों एवं क्षेत्रवासियों ने यह संदेश दिया कि देवभूमि की धार्मिक परंपराओं के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण का संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। समलौण पौधारोपण के माध्यम से धार्मिक आयोजन को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली,संस्कार और पर्यावरण चेतना की विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया। आज रोपा गया पौधा आने वाले वर्षों में वृक्ष का रूप लेकर मंदिर परिसर की शोभा बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं और स्थानीय समाज को प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम में रोपे गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने ली। उन्होंने पौधों की नियमित देखभाल और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हुए कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक है,जब लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखा जाए। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगाईं ने किया। उन्होंने कहा कि बगड़ेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा जैसे पावन अवसर पर समलौण पौधारोपण करना धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से पुण्य एवं प्रेरणादायी कार्य है। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए बेलपत्र और रुद्राक्ष के पौधे भविष्य में पल्लवित-पोषित होकर विशाल वृक्षों का रूप धारण करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को इस पावन अवसर की याद दिलाने के साथ पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा भी देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि समलौण केवल पौधा लगाने की परंपरा नहीं,बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी,संवेदना और संरक्षण का संकल्प है।‌देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में वृक्षों और प्रकृति को विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसे में प्रत्येक धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन को पौधारोपण से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण के अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। सावित्री देवी ममगाईं ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने,प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने तथा रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंदिर,मठ,धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थान पर्यावरण जागरूकता के केंद्र बनें तो समाज में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना और अधिक मजबूत होगी। बगड़ेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में सम्पूर्ण क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था,सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे संगम ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को एक अलग पहचान प्रदान की। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देवभूमि की संस्कृति में भगवान की आराधना के साथ प्रकृति की सेवा भी सच्ची श्रद्धा का ही एक स्वरूप है।

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