Sunday 23/ 08/ 2026 

Bharat Najariya
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मढ़ी चौरास में गूंजी नवाचार और उद्यमिता की नई सोच-विद्यार्थियों को दिए आत्मनिर्भर बनने के मंत्र


श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के संस्थान नवाचार परिषद प्रकोष्ठ के तत्वावधान में शिशु मंदिर इंटर कॉलेज,मढ़ी चौरास में नवाचार एवं उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयी विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच,नवाचार की भावना और उद्यमिता के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें भविष्य में रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संस्थान नवाचार परिषद के पदाधिकारियों,विषय विशेषज्ञों,विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें बदलते समय में नवाचार और उद्यमिता की बढ़ती उपयोगिता से अवगत कराया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्थान नवाचार परिषद के अध्यक्ष प्रो.गोविंदन ने अतिथियों,शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानते हुए नए विचारों के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार के प्रति जिज्ञासु बनने और अपने आसपास की समस्याओं को अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े उद्यम की शुरुआत एक छोटे से विचार से होती है और यदि विचार में नवीनता,मेहनत तथा उसे धरातल पर उतारने का साहस हो तो वह भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। शिशु मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जय सिंह नेगी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के संस्थान नवाचार परिषद द्वारा रसायन विज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से इतर व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने के साथ उनके व्यक्तित्व और भविष्य की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ.आशीष बहुगुणा ने विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह समस्याओं के समाधान खोजने,नए अवसरों को पहचानने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की सोच है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने आसपास की छोटी-छोटी समस्याओं को पहचानें और उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करें। यही विचार आगे चलकर किसी उत्पाद, सेवा अथवा उद्यम का रूप ले सकते हैं। डॉ.बहुगुणा ने विद्यार्थियों को अपने कौशल और रुचि के अनुरूप क्षेत्र चुनने,नए प्रयोग करने तथा असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक और नवाचार ने युवाओं के सामने उद्यमिता के अनेक नए रास्ते खोले हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ.भास्करन ने भी विद्यार्थियों को नवाचार एवं उद्यमिता के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में बचपन से ही रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित की जानी चाहिए। यही गुण उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने नए विचारों पर काम करने तथा भविष्य में स्वयं का नवोद्यम एवं उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है,आवश्यकता उन्हें सही दिशा,मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नवाचार,उद्यमिता,स्वरोजगार और नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने से संबंधित विषयों को गंभीरता से समझा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना,उनमें नवाचार एवं रचनात्मकता की भावना विकसित करना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना रहा। विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के संस्थान नवाचार परिषद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई सोच विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर दिशा चुनने में मदद करते हैं। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों में नवाचार एवं उद्यमिता के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह के साथ हुआ।

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