सीता सर्किट से संवरेगी पौड़ी की धार्मिक विरासत-78 लाख से शुरू होगा विकास का पहला चरण

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी जनपद की धार्मिक,पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में सीता सर्किट के समग्र विकास की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री घोषणा के क्रम में शुक्रवार को जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने संबंधित विभागों,कार्यदायी संस्था,स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक कर सीता सर्किट की विकास योजना पर विस्तार से मंथन किया। बैठक में धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। सीता सर्किट के प्रथम चरण के विकास कार्यों के लिए 78 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस धनराशि से प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ रामायण से जुड़े प्रसंगों को आकर्षक एवं प्रमाणिक तरीके से प्रदर्शित करने की योजना है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बैठक में सितोनस्यूं पट्टी स्थित विदाकुटी मंदिर,फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर,कोटसाड़ा स्थित वाल्मीकि मंदिर तथा देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर सहित सीता सर्किट से जुड़े अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के सुनियोजित विकास पर चर्चा की गई। स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि सीता सर्किट का विकास पौड़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इन पौराणिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने पर देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापार,होम स्टे,परिवहन,हस्तशिल्प तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त होगी। प्रथम चरण में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रामायण की कथाओं और उनसे जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक प्रसंगों पर आधारित भित्ति चित्र,दीवार चित्र,मूर्तिशिल्प एवं दिशा-सूचक संकेतक लगाए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जल एटीएम सहित आवश्यक यात्री सुविधाओं का विकास किया जाएगा। मंदिर परिसरों में आवश्यक मरम्मत,रंग-रोगन और अन्य आधारभूत सुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा। देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में प्रथम चरण में दिशा-सूचक संकेतक लगाए जाएंगे,जबकि यहां पार्किंग सुविधा का विकास द्वितीय चरण में प्रस्तावित किया गया है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथाओं को प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया जाए,ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इन स्थलों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को सहजता से समझ सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि मंदिर परिसरों का विकास वहां के प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने अनावश्यक निर्माण और अत्यधिक सजावटी कार्यों से बचने के निर्देश देते हुए कहा कि विकास योजनाओं में सबसे पहले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक और उपयोगी सुविधाओं को स्थान दिया जाए। उन्होंने मंदिरों की वास्तविक तस्वीरों के आधार पर डिजाइन तैयार करने,पर्याप्त खुला स्थान रखने,परिक्रमा पथ विकसित करने तथा मंदिर परिसरों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। साथ ही सौर पैनलों को भी इस प्रकार स्थापित करने को कहा गया कि उनकी उपयोगिता के साथ मंदिर परिसर की सुंदरता और एकरूपता प्रभावित न हो। बैठक में विभिन्न धार्मिक स्थलों के स्थल मानचित्र प्रस्तुत किए गए। जिलाधिकारी ने प्रस्तुत योजना में अपेक्षित त्रिआयामी डिजाइन एवं भ्रमण दृश्य उपलब्ध नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण एवं दूरगामी विकास के लिए एक से अधिक वास्तु विशेषज्ञों से त्रिआयामी डिजाइन और भ्रमण दृश्य तैयार करवाने के निर्देश दिए,ताकि विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ डिजाइन का चयन कर विकास कार्यों को उसी के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर से जुड़े भूमि मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। भूसमाधि स्थल के लिए भूमि दान करने पर सहमति बनने की जानकारी दी गई,जबकि धर्मशाला के लिए भूमि संबंधी सहमति की प्रक्रिया जारी है। मंदिर के बाईं ओर भित्ति चित्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है। वहीं कोटसाड़ा स्थित वाल्मीकि मंदिर के स्थल मानचित्र की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को मौके पर जाकर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा आवश्यक अनापत्ति संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित मंदिरों की भूमि का सर्वे कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को मानचित्र लेकर गांवों में मौके पर जाकर भूमि का सत्यापन करने तथा उसकी स्थिति को स्थल योजना में स्पष्ट रूप से दर्शाते हुए सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि सीता सर्किट के द्वितीय चरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर तक संपर्क मार्ग,सड़क के लिए आवश्यक भूमि एवं मुआवजा,देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में पार्किंग,सीता माता मंदिर में धर्मशाला तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भूमि संबंधी सहमति,मुआवजा आकलन एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए,ताकि आगामी चरण के विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। बैठक में संबंधित गांवों के ग्राम प्रधानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उनके सुझाव एवं क्षेत्रीय फीडबैक लिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सीता सर्किट का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए,बल्कि इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी और क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को भी शामिल किया जाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यों में गुणवत्ता,पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए,ताकि सीता सर्किट आने वाले समय में पौड़ी जनपद के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सके। बैठक में जिला पर्यटन विकास अधिकारी कमल किशोर जोशी,हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ.सर्वेश उनियाल,गढ़वाल मंडल विकास निगम से अरुण चमोली सहित संबंधित विभागों के अधिकारी,फलस्वाड़ी,कोटसाड़ा,देवल आदि गांवों के ग्राम प्रधान,स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अन्य हितधारक उपस्थित रहे।
