गढ़वाल विश्वविद्यालय में गूंजी नवाचार और उद्यमिता की नई सोच-विद्यार्थियों से नए विचारों को रोजगार में बदलने का आह्वान

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में संस्थान नवाचार परिषद के तत्वावधान में रसायन विज्ञान विभाग के सहयोग से विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों,शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। वक्ताओं ने कहा कि आज के बदलते दौर में युवाओं को केवल रोजगार की तलाश करने वाला नहीं,बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने वाला उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम के दौरान नवाचार,शोध,रचनात्मक सोच और उद्यमिता की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपने भीतर छिपी प्रतिभा और नए विचारों को पहचानने तथा उन्हें व्यावहारिक रूप देकर समाज और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रो.डी.एस.नेगी ने नवाचार एवं उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े परिवर्तन की शुरुआत एक नए विचार से होती है। विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए नए और उपयोगी विचार विकसित करने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल परंपरागत सोच तक सीमित न रहें,बल्कि अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए ऐसे नए प्रयोग करें,जिनसे समाज को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध तभी अधिक प्रभावी माना जाएगा,जब उसके परिणामों का व्यावहारिक उपयोग समाज के लिए किया जा सके। प्रो.एस.सी.सती ने विद्यार्थियों को नए एवं रचनात्मक विचारों के साथ शोध कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोध का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए,बल्कि शोध के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने की दिशा में प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार आधारित शोध देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध विषयों में नए दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक पक्ष पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक डॉ.भास्करन ने विश्व उद्यमिता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में उद्यमिता युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने नवाचार और उद्यमिता की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी अपने ज्ञान,प्रतिभा और नए विचारों को सही दिशा में आगे बढ़ाएं तो वे स्वयं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने विचारों को केवल कागज तक सीमित न रखने,बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने का प्रयास करने का आह्वान किया। डॉ.विजय कांत एवं डॉ.सुरेंद्र पुरी ने शोधार्थियों को अपने शोध कार्य में नवीन दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शोध के क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन हो रहा है और ऐसे समय में शोधार्थियों के लिए रचनात्मक सोच तथा नवाचार को अपनाना बेहद आवश्यक है। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने विषय से संबंधित नई संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए और ऐसी शोध परियोजनाओं पर काम करना चाहिए,जिनका उपयोग समाज,उद्योग और आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में किया जा सके। विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने नवाचार और उद्यमिता से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में डॉ.रोहित मगर ने सभी अतिथियों,शिक्षकों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में उपस्थित संकाय सदस्यों ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विश्व उद्यमिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर नवाचार,रचनात्मक सोच और उद्यमिता की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि बदलते दौर में ज्ञान के साथ नई सोच,शोध के साथ प्रयोग और शिक्षा के साथ उद्यमिता को जोड़कर ही युवा आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर सकते हैं।
