श्रीमद्भागवत की अमृतधारा के बीच 4 सितंबर को सजेगी कृष्ण जन्मोत्सव की भव्य झांकियां

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर भक्ति,आस्था और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर होने जा रही है। कल्याणेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में 25 अगस्त से 5 सितंबर तक श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। वहीं,इसी धार्मिक माहौल को और भव्य स्वरूप प्रदान करते हुए 4 सितंबर को भागीरथी कला संगम सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य आयोजन एवं आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। कल्याणेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बाल व्यास रामचन्द्राचार्य महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान श्रद्धालुओं को कराया जा रहा है। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं,सनातन धर्म के संदेश और भक्ति की महिमा का सुंदर वर्णन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन को विशेष बनाने में श्री जयदयाल अग्रवाल संस्कृत उत्तरमध्यमा विद्यालय श्रीनगर के छात्र-छात्राओं,शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विद्यालय परिवार द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित मनमोहक झांकियों के माध्यम से मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। झांकियों में श्रीकृष्ण जन्म,शिव-कृष्ण मिलन,पूतना वध,शेषनाग पर कृष्ण नृत्य,कृष्ण-गोपियों की रासलीला,सुदामा मिलन तथा गुरु सांदीपनि के आश्रम में कृष्ण,बलराम एवं सुदामा जैसे प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया। इन झांकियों ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया। कथा एवं झांकियों के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्तजन भगवान कल्याणेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक करने के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। कथा के समापन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा और प्रसाद वितरण किया जाएगा। श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक वातावरण के बीच 4 सितंबर को भागीरथी कला संगम सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में कल्याणेश्वर मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष आयोजन किया जाएगा। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने बताया कि भागीरथी कला संगम द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को पारंपरिक,धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप में भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी,जो श्रद्धालुओं और नगरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति,लोक परंपरा,कला और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का माहौल रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ मुहूर्त आते ही रात्रि 12 बजे मंदिर परिसर जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठेगा। श्रद्धालु भगवान के जन्मोत्सव के साक्षी बनेंगे और इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य जगदीश प्रसाद सकलानी,प्रबंधक हरिश चन्द्र अग्रवाल,कल्याणेश्वर मंदिर के प्रबंधक सुशील कुमार,डॉ.रजनीश गर्ग,मंदिर के पुजारी कन्हैया बलूनी सहित विद्यालय के शिक्षक-कर्मचारी एवं मंदिर परिसर के समस्त कर्मचारी मौजूद रहे। विद्यालय परिवार एवं मंदिर समिति के सहयोग से आयोजित धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रीनगर की धार्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान की है। आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है तथा झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु,सामाजिक कार्यकर्ता,कलाकार एवं नगरवासी कल्याणेश्वर मंदिर पहुंचेंगे। राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने नगरवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में सहभागी बनें और धार्मिक आस्था के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी भागीदारी निभाएं। इस पूरे आयोजन से श्रीनगर में श्रीमद्भागवत कथा की आध्यात्मिक गूंज के साथ ही कृष्ण जन्माष्टमी की भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक छटा देखने को मिलेगी,जो नगरवासियों के लिए आस्था,संस्कृति और उत्सव का यादगार संगम बनने जा रही है।
