Friday 16/ 01/ 2026 

Bharat Najariya
​कुमाऊं वैश्य महासभा ने मकर संक्रांति पर वितरित किया खिचड़ी प्रसादपुलिस किसान के परिवार को न्याय दिलवाने के लिए कर रही निष्पक्ष जांचसितारगंज में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का समापन।अधिवक्ता के निधन पर फुल कोर्ट रेफरेंस, अधिवक्ता संघ ने जताया शोकसमाजसेवा की मिसाल बनी विभा पाण्डेय(तिवारी) का जन्मदिन, ब्लड बैंक में काटा केकरुद्रपुर।धरा सेवा फाउंडेशन उत्तराखण्ड की अध्यक्ष एवं जानी-मानी समाजसेविका विभा पाण्डेय(तिवारी) का जन्मदिन गाबा चौक स्थित रुद्रपुर चेरिटेबल ब्लड बैंक में सादगी और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर केक काटकर उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की गई।बचपन से ही समाजसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाली विभा पाण्डेय(तिवारी) ने कोविड जैसी वैश्विक महामारी के कठिन दौर में भी अपनी जान की परवाह किए बिना फील्ड में रहकर जरूरतमंदों की सेवा की। वे लगातार गरीब व वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, कॉपी-किताबें उपलब्ध कराकर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही हैं।जन्मदिन के अवसर पर उनके पिता ने पुत्री को आशीर्वाद देते हुए समाज सेवा की यह यात्रा निरंतर जारी रखने की शुभकामनाएं दीं। वहीं ब्लड बैंक की टीम ने नए वर्ष की बधाई देते हुए उनके सेवा कार्यों की सराहना की।इस मौके पर रमाकांत पाण्डेय, प्रदीप सिंह खालसा, दिव्यांशु विश्वकर्मा, सत्यम शर्मा सहित रुद्रपुर चेरिटेबल ब्लड बैंक की समस्त टीम उपस्थित रही।उत्तरायणी महोत्सव हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ संपन्न हुआबीमार युवक के लिए ‘देवदूत’ बनकर पहुंचे महापौरसितारगंज सड़क पर सरेआम मारपीट करने वाले उपद्रवियों को पकड कर किया चालान

भीषण आपदा ने पहाड़ों में जो कहर बरपाया उसे कौन भूल सकता हैं हजारों लोगो के आशियाने लोगो के सामने ही नदी में समा गए देवभूमि पूरी तरह से प्रकृति के आक्रोश से भयभीत हो उठी हर जगह बर्बादी की मंजर नजर आ रहा था माहौल था अफरातफरी का तो वही शासन प्रशासन को भी कुछ समझ नही आ रहे था। जिसके बाद आपदा से निपटने को लेकर बड़े– बड़े दावे किए गए। बड़े– बड़े नेता पहाड़ों में आकर भविष्य में इस तरह की आपदा से निपटने के लिऐ ठोस कदम उठाने की लिए बात कर रहे थे लेकिन इस साल की पहली मानसूनी बारिश ने ही सरकार की पोल खोल कर रख दी है जिन रास्तों के जरिए सरकार लोगो को बचाने का दावा करती थी वह रास्ते पहली बारिश मे ही तहस नहस हो गए। जिन पुलो के जरिए आपदा राहत दलों को लोगो की सुरक्षा के लिए भेजा जाना था वो पुल भी नही रहे हैं।
मगर वहा बारिश के दौरान मोबाइल टावरों के सिग्नल ही बंद हो गए जिस कारण कई गांव तो ऐसे थे जिनका संपर्क पूरी तरह से देश और दुनिया मे पूरी तरह से टूट चुका था तो वही उफान भर रही नदियों के किनारे बाढ़ सुरक्षा दिवारे भी कई जगह नजर नही आ रही थी जो पूरी तरह से लोगो को साल 2013 मे आयी भीषण आपदा की याद दिला रही थी वो तो प्रकृति का शुक्र हैं कि बारिश कुछ दिनों बाद ही रुक गई और नदियों का जलस्तर कम हो गया। लेकिन सरकार के तमाम आपदा विकास कार्यों की पोल खुल गई।
वही जुलाई माह में मौसम विभाग की चेतावनी एक बार फिर दे दी गयी है।
वही शासन ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो आपदा प्रबंधन टीम को सावधान कर दें लेकिन एक बार फिर हो रही बारिश ने लोगो को परेशान कर दिया और यह भी सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर हमारी सरकार कब बेहतर योजना बनायेगी।