Saturday 27/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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उत्तराखण्ड

देवभूमि उत्तराखंड का पौराणिक मंजीन कांडा मेला श्रद्धा-आस्था और लोक-संस्कृति का अनोखा उत्सव 22-23 अक्टूबर को होगा आयोजन

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों में दो दिवसीय पौराणिक मंजीन कांडा मेला (देलचौरी) की तैयारियां जोरों पर हैं। यह मेला विगत कई वर्षों से लगातार आयोजित होने वाला,देवभूमि उत्तराखंड का प्रसिद्ध मेला है,जो देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं और भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस वर्ष मेला 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित होगा और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर तथा आस्था का अद्भुत प्रदर्शन करेगा। मेला आयोजन को लेकर श्रीनगर में पुलिस,प्रशासन और मंदिर समिति की संयुक्त बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में श्रीनगर कोतवाली प्रभारी जयपाल सिंह नेगी,मंदिर के मुख्य पुजारी विमल भट्ट,मंदिर समिति अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद भट्ट,ग्राम प्रधान अंकित भट्ट,देलचौरी चौकी इंचार्ज मनोज कुमार,सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे। कोतवाल जयपाल सिंह नेगी ने मेले परिसर और आसपास क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए कहा कि मेले में किसी भी प्रकार की जाम की स्थिति न बने,श्रद्धालु मंदिर दर्शन में सहज और आरामदायक रूप से पहुंचें। ट्रैफिक प्रबंधन,पार्किंग व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था के तहत चिकित्सक और एम्बुलेंस उपलब्ध रहेंगी। पेयजल,प्रकाश और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष मेले में दुरराज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 40-42 निशान लेकर श्रद्धालु भक्तगण पहुंचेंगे। देश-विदेश से आए श्रद्धालु,पहाड़ी वाद्य-यंत्रों ढोल-दमाऊं के साथ नाचते-गाते हुए अपने-अपने क्षेत्रों से निसान लेकर मंदिर में प्रवेश करेंगे,जो मेले को एक अद्भुत दृश्य और जीवंत लोक-संस्कृति का रूप देगा। ग्राम प्रधान अंकित भट्ट ने बताया कि स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों की टीम प्रशासन के साथ सहयोग करेगी,ताकि मेला शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो सके। मंदिर समिति अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद भट्ट ने कहा कि श्रद्धालु भक्तगण पारंपरिक भेष-भूषा में सज-धज कर इस आयोजन में भाग लेंगे,जिससे यह मेला श्रद्धा और उल्लास का महापर्व बन जाएगा। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है,बल्कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति और परंपरा का जीवंत दस्तावेज भी है। दो दिवसीय यह पर्व श्रद्धालुओं,पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को रंग-रंगीनी,उत्सव और लोकधरोहर की खुशबू से सराबोर अनुभव देगा।

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