Friday 01/ 05/ 2026 

Bharat Najariya
जेसीज पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर में श्रमिक दिवस एवं बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष आयोजनरुद्रपुर में स्पा सेंटर पर छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़ ‘खबर पड़ताल’ के नाम पर चल रहे फर्जी फेसबुक पेज पर भी उठे सवालरूद्रपुर में पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटरों की बढ़ती संख्या पर सवाल, जांच व्यवस्था मजबूत करने की मांगरुद्रपुर शहर में तेजी से बढ़ते पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर अब जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में सामने आए एक मामले ने जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार आवास विकास क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने पास के एक कलेक्शन सेंटर से ब्लड सैंपल की जांच कराई। रिपोर्ट मिलने के बाद जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह जताया गया और पुनः जांच कराने की सलाह दी गई। इसके बाद व्यक्ति ने दूसरे मान्यता प्राप्त लैब, Dr. Lal PathLabs में परीक्षण कराया, जहां दोनों रिपोर्टों में स्पष्ट अंतर सामने आया।इस अनुभव ने न केवल संबंधित व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि जांच की गुणवत्ता और मानकों का पालन हर जगह समान रूप से नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी जांच उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में रिपोर्ट की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।शहर में बड़ी संख्या में कलेक्शन सेंटर खुलने से सुविधा तो बढ़ी है, लेकिन साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ, मानक उपकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी हो गया है। स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए नियामक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और सत्यापन अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि आमजन को भी जांच करवाते समय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल प्रमाणित तथा विश्वसनीय संस्थानों का ही चयन करना चाहिए। साथ ही संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि लोगों का विश्वास और सुरक्षा दोनों कायम रह सकेजागरूकता ही सुरक्षा है सही जांच सही उपचार की पहली शर्त हैसस्ती सुविधा के बजाय प्रमाणित गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।रिपोर्ट पर संदेह हो तो दोबारा जांच कराने में संकोच न करेंस्वास्थ्य के मामले में लापरवाही नहीं सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।जेसीज पब्लिक स्कूल में हिंदुस्तान ओलंपियाड 2025 का डीएम ने किया शुभारंभहोटल बन चुके होमस्टे पर डीएम का डंडा, 17 पंजीकरण निरस्तपर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू, अवैध संचालन पर सख्त कार्रवाई जारीदेहरादून, 29 अप्रैल। जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने होमस्टे संचालन पर बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर हुई गहन जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रथम चरण में 17 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही इन्हें पर्यटन विभाग की वेबसाइट से विलोपित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।जिला प्रशासन ने “ऑपरेशन सफाई” चलाते हुए महज सात दिनों में मजिस्ट्रेट स्तर की पांच टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि कई होमस्टे होटल की तरह संचालित किए जा रहे थे, जहां नियम विरुद्ध बार संचालन, तेज आवाज में डीजे और देर रात तक पार्टियां आयोजित हो रही थीं। इन स्थानों पर नशे और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के अड्डे बनने की शिकायतें भी मिलीं, जिससे आमजन की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा था।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और आमजन की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों की आय में वृद्धि करना है, न कि इसे व्यावसायिक होटल में बदलना।जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं थी, अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। कई स्थानों पर फूड लाइसेंस नहीं पाया गया। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे और कुछ इकाइयां लीज या किराये पर चलाई जा रही थीं, जो नियमों के विपरीत है। विदेशी नागरिकों के ठहराव की अनिवार्य सूचना भी कई जगह उपलब्ध नहीं कराई गई।प्रशासन ने पाया कि कुछ होमस्टे बारात घर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे थे, जबकि कई स्थानों पर स्वामी का निवास ही नहीं था। मसूरी और शहरी क्षेत्रों में स्वामित्व परिवर्तन और नवीनीकरण न कराने के मामले भी सामने आए हैं।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी होमस्टे संचालक नियमावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।————————————++++▢ सवालों के घेरे में रुद्रपुर की व्यवस्थाएंदेहरादून में कार्रवाई के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि रुद्रपुर में बिना मानकों के संचालित पेइंग गेस्ट हाउस, गेस्ट हाउस और होटल पर कब कार्रवाई होगी। शहर में लंबे समय से बिना पंजीकरण, बिना अग्निशमन व्यवस्था और बिना आवश्यक लाइसेंस के कई प्रतिष्ठान संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर बाहरी व्यक्तियों को ठहराया जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ रहा है।अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन रुद्रपुर में भी देहरादून जैसी सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध संचालन पर लगाम लगाता है या फिर ये व्यवस्थाएं यूं ही चलती रहेंगी।सितारगंज में मानसिक गणना का महाकुंभ: 500+ प्रतिभागियों के बीच मुदित राठी बने “चैंपियन ऑफ चैंपियंस”।काशीपुर में शिक्षक गरिमा शिविर संपन्न, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा पर हुआ मंथनकाशीपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में संचालित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, जनपद उधम सिंह नगर का शिक्षक गरिमा शिविर काशीपुर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र के सभागार में संपन्न हुआ। शिविर में काशीपुर, जसपुर एवं रुद्रपुर से गायत्री परिवार के सदस्य एवं शिक्षकगण उत्साहपूर्वक शामिल हुए।कार्यक्रम में जसपुर से दिग्विजय सिंह, रुद्रपुर से ओमवीर सिंह, नमो नारायण, सोमपाल तथा काशीपुर से राजीव झा, सर्वेश रस्तोगी, महिपाल जी सहित कात्यानी महिला मंडल की बहनों की सहभागिता रही। इसके अतिरिक्त हल्दुचौड़ से बसंत पांडे भी उपस्थित रहे।शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली ने कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर प्रमोद भटनागर ने शिक्षकों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के महत्व एवं उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ शांतिकुंज के सी.डी. थपलियाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए परीक्षा की उपयोगिता पर जोर दिया।कार्यक्रम का संचालन प्रदेश सह-संयोजक पुष्पा जी ने किया, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव जिला संयोजक यशवंत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन जिला इकाई, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा उधम सिंह नगर द्वारा संपन्न कराया गया।शिविर का आयोजन दिव्य एवं भव्य रहा, जिसकी उपस्थित सभी लोगों ने सराहना करते हुए आयोजकों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।खानपुर न.1 मे आयोजित अखण्ड नाम सकीर्तन मे शामिल हुऐ विधायक शिव अरोरालोहाघाट में पेयजल के लिए मचा हाहाकार 4 से 5 दिन में मिल रहा है पानी।
उत्तराखण्ड

गगवाडस्यूं घाटी-जहां प्रकृति का सौंदर्य और आस्था एकाकार होते हैं

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पर्वतीय अंचल पौड़ी जनपद का मुख्यालय जिसे हम मंडल मुख्यालय भी कहते हैं,अपने ठीक पीछे एक अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य समेटे बैठी है गगवाडस्यूं घाटी। यह घाटी कटोरी आकार की है,जो चारों ओर से पहाड़ों की गोद में समाई हुई है और लगभग 33 सुंदर गांवों का घर है। यह घाटी अपनी सुरम्यता,सांस्कृतिक परंपरा और अद्भुत सूर्यास्त के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां का सूर्यास्त शायद दुनिया के सबसे मनमोहक दृश्यों में से एक है,जब डूबते सूरज की लालिमा इस घाटी को सुनहरी चादर में ढक देती है,तो दृश्य अलौकिक हो उठता है। इस घाटी का प्रमुख बाजार ल्वाली (Lwali) है,जिसके समीप ही ल्वाली झील निर्माणाधीन है। यह झील जब पूर्ण रूप से बन जाएगी,तो यह पूरी घाटी के आकर्षण में चार चांद लगा देगी।
देवभूमि का दिव्य केंद्र-सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर
गगवाडस्यूँ घाटी के बलोडी गांव में स्थित सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर इस क्षेत्र की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यह मंदिर पौड़ी से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां तक पक्की सड़क द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के दर्शन के साथ-साथ जब आप इस घाटी को निहारते हैं,तो मन स्वतः ही इस भूमि के सौंदर्य में खो जाता है। वर्ष 2016 से यहाँ पर बैकुंठ चतुर्दशी के पावन अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है,जो अब इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और भगवान महादेव से मनोकामनाएं मांगते हैं। कैसे प्रकट हुए देवलेश्वर महादेव-एक दिव्य कथा
धर्मग्रंथों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार,व्यास मुनि के 108 प्रमुख शिष्यों में से एक थे देवल मुनि। अपने गुरु की आज्ञा से वे भगवान विष्णु की आराधना हेतु एक शांत और सुंदर स्थान की खोज में निकले। लंबे भ्रमण के बाद जब वे गगवाडस्यूं घाटी के बलोडी गांव पहुंचे,तो उन्हें यह स्थान अत्यंत उपयुक्त लगा। उन्होंने अपनी नारायणी शिला यहीं स्थापित की और भगवान विष्णु की कठोर तपस्या आरंभ कर दी। उस समय इस क्षेत्र पर विडलाक्ष नामक राक्षस का आतंक था,जो भगवान विष्णु का शत्रु था। जब उसे ज्ञात हुआ कि कोई ऋषि विष्णु की उपासना कर रहा है,तो वह क्रोध में भरकर देवल मुनि की तपस्या भंग करने आया। परंतु वह न तो उनकी तपस्या तोड़ पाया,न ही उनका वध कर सका। अंततः उसने क्रोध में आकर देवल मुनि को उनकी नारायणी शिला सहित समीप बह रही नदी में फेंक दिया। उस समय चातुर्मास का पवित्र काल चल रहा था-यह अवधि स्वयं भगवान भोलेनाथ के अधीन मानी जाती है। भगवान शंकर अपने गणों सहित पृथ्वी का संरक्षण कर रहे थे। उन्हीं के गण भृंगी ने यह घटना देखी। भृंगी ने तत्काल विडलाक्ष को युद्ध के लिए ललकारा और उसका वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने देवल मुनि को शिला सहित नदी से बाहर निकाला। धीरे-धीरे जब देवल मुनि ने अपनी आंखें खोली,तो उनके सामने एक अद्भुत श्वेत पुरुष खड़े थे। जब उन्होंने पूछा-यह तेजस्वी पुरुष कौन हैं,तो भृंगी ने उत्तर दिया,ये स्वयं देवाधिदेव महादेव हैं। यह सुनकर देवल मुनि भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा,मैं तो विष्णु की उपासना कर रहा था,फिर दर्शन महादेव ने क्यों दिए,भृंगी ने उत्तर दिया,हे मुनिवर भगवान विष्णु और भगवान महादेव में कोई भेद नहीं है। अब जब यहां महादेव ने स्वयं प्रकट होकर आपकी रक्षा की है,तो आपको इस स्थान पर उनकी आराधना करनी चाहिए। यह कहकर भृंगी वहां से अंतर्धान हो गए। देवल मुनि ने उसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और दीर्घकाल तक देवाधिदेव महादेव की आराधना करते रहे। अंततः उन्होंने इसी भूमि पर देह त्याग दी। तब से यह स्थान देवल मुनि की स्मृति में देवलेश्वर महादेव नाम से प्रसिद्ध हुआ। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां भगवान महादेव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं-विशेषकर जो दंपति संतान की इच्छा लेकर यहां आते हैं, उनकी झोली कभी खाली नहीं लौटती। बैकुंठ चतुर्दशी मेला-आस्था,संस्कृति और श्रद्धा का संगम
यहां वर्षों से खड़े दिए का यज्ञ होता आ रहा है। किंतु वर्ष 2016 से इसे संगठित रूप में भव्य मेले के रूप में मनाया जाने लगा। बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं, मंदिर परिसर दीपों से जगमगा उठता है और सम्पूर्ण घाटी हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठती है। गगवाडस्यूं घाटी न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है,बल्कि यह देवभूमि उत्तराखंड की आस्था,परंपरा और पौराणिक गौरव का जीवंत प्रतीक भी है। यहां का हर पत्थर,हर झरना,और हर हवा की लहर भगवान शिव की महिमा का बखान करती प्रतीत होती है। जो एक बार देवलेश्वर महादेव के दर पर पहुंचता है उसका हृदय स्वयं शिवमय हो जाता है।

Check Also
Close