Saturday 27/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
लोकतंत्र का काला अध्याय 25 जून1975मसूरी के युवा अधिवक्ता आर्यन देव उनियाल को मिली बड़ी जिम्मेदारीग्राम बूंगा में उत्तरा केयर अस्पताल का निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर सम्पन्न,41 लोगों ने उठाया लाभमसूरी में अब फास्टैग से कटेगा पर्यटन शुल्क!, माल रोड और कोलू खेत बैरियर पर डिजिटल व्यवस्था की तैयारी,मसूरी मोतीलाल नेहरू मार्ग पर अवैध पार्किंग पर लगेगा ब्रेक, सड़क के बीच डिवाइडर लगने से जाम से मिलेगी राहत, स्थानीय लोगों ने किया स्वागतखेत बचाओ अभियान कार्यक्रम मे पुष्पवर्षा कर केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं मुख्यमंत्री का किया भव्य स्वागत।राष्ट्रीय स्वर्णकार संघ ने संजय कुमार गर्ग का किया भव्य सम्मानरक्तदाता देवदूत से कम नहीं – रितु डोभालआपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय-धामी,सितारगंज निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर रोटरी क्लब आफ सितारगंज द्वारा छविल लगाकर जल एवं चने का किया गया वितरण
उत्तराखण्ड

“तड़पता रहा हाथी… सोता रहा वन विभाग!”लोकेशन गदरपुर क्षेत्र के पीपलपारा रेंजरिपोर्टर महेंद्र पाल सिंह उधम सिंह नगर

उधम सिंह नगर में वन विभाग और रेलवे की लापरवाही ने एक मासूम जानवर की जान पर बना दिया बड़ा संकट।

उधम सिंह नगर जनपद के पीपल पड़ाव रेंज के तिलपुरी इलाके में आज एक दर्दनाक घटना सामने आई। जंगल से गुजर रही रेलवे लाइन पर एक हाथी ट्रेन की चपेट में आ गया। टक्कर लगते ही हाथी पास में बने एक गड्ढे में जा गिरा, जो दलदल में बदल चुका था।

हैरानी की बात यह है कि हाथी पिछले 15 घंटे से अधिक समय तक दलदल में फंसा तड़पता रहा… लेकिन वन विभाग उसे बाहर निकालने में नाकाम साबित हुआ। रेस्क्यू टीम और मशीनें मौके पर पहुंचीं, कोशिशें भी की गईं, लेकिन हाथी को निकालने में विभाग पूरी तरह से फेल रहा।

सबसे बड़ा सवाल रेलवे विभाग पर भी उठ रहा है।
रेलवे ने पहले दावा किया था कि जंगल से गुजर रही इस रेलवे लाइन पर सेंसर लगाए गए हैं— जो ट्रैक पर किसी भी जानवर की हलचल को पकड़कर ट्रेन को तुरंत रोक देंगे।
लेकिन हकीकत इसके उलट सामने आई।
ना सेंसर काम कर रहे थे… ना ही कोई अलर्ट मिला।
नतीजा— एक और बड़ा हादसा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर रेलवे और वन विभाग समय से सक्रिय होते, तो हाथी को घंटों तड़पना न पड़ता।

Check Also
Close