Saturday 27/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर ने कीएसीसीएलएमपीकॉन की प्रीकॉन्फ्रेंस की मेजबानी

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की झोली में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। मेडिकल कॉलेज को एसीसीएलएमपी- एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल केमिस्ट्री एंड लेबोरेटरी मेडिसिन प्रैक्टिशनर्स- 2026 की 13वीं प्रीकॉन्फ्रेंस सीएमई-सह-व्यावहारिक कार्यशाला की मेजबानी का सौभाग्य मिला है। इस सीएमई में फ्यूरस्टिक क्लीनिक्सः माइक्रोफ्लुइडिक्स, बिग डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से प्रयोगशाला चिकित्सा को फिर से तैयार करना है पर देश-भर के बायोकेमिस्ट्री एक्सपर्ट्स ने मंथन किया। उल्लेखनीय है, एसीसीएलएमपी, यूरोपियन फेडरेशन ऑफ क्लिनिकल केमिस्ट्री एंड लेबोरेटरी मेडिसिन- ईएफएलएम, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ क्लिनिकल केमिस्ट्री एंड लेबोरेटरी मेडिसिन- आईएफसीसी का एक संबद्ध सदस्य होने के साथ-साथ वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ पैथोलॉजी एंड लेबोरेटरी मेडिसिन- डब्ल्यूएएसपीएएलएम का महत्वपूर्ण सदस्य भी है। सीएमई में दोनों संस्थाओं ने भारतीय चिकित्सा पेशेवरों के बीच नैदानिक उत्कृष्टता को उन्नत करने के लिए विचारों, ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने हेतु मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

दूसरी ओर ई-पोस्टर प्रतियोगिता में एचआईएमएस- देहरादून की डॉ. ईशा त्यागी विजेता रहीं। टीएमयू में माइक्रोबायोलॉजी की रेजिडेंट डॉ. शुभी सिंह ने दूसरा, जबकि फार्माकोलॉजी के रेजिडेंट डॉ. अमोल अग्रवाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। बायोकेमिस्ट्री की फैकल्टी डॉ. सदाफ अली, फार्माकोलॉजी की फैकल्टी डॉ. मीनू थॉमस और जनरल मेडिसिन की रेजिडेंट डॉ. भव्या खत्री ने मौखिक प्रस्तुति में अपने-अपने विभागों के लिए शानदान प्रदर्शन किया। बायोकेमिस्ट्री की एचओडी डॉ. पी. उषा किरण के दूरदर्शी नेतृत्व में डॉ. अर्कजीत दासगुप्ता, डॉ. सुशील यादव और डॉ. प्रेरणा बंथिया ने इस परियोजना का नेतृत्व किया और संकाय सदस्यों, रेजीडेंट और पीएचडी फेलो की टीम ने इन युवा लैब डॉक्टरों के सपने को वास्तविकता में बदल दिया। उत्तर प्रदेश चिकित्सा परिषद की ओर से थ्री क्रेडिट ऑवर्स से मान्यता प्राप्त इस एक दिवसीय सीएमई ने संस्थान की गौरवशाली उपलब्धियों की सूची में एक और उपलब्धि जोड़ दी। इसके साथ ही टीएमएमसी एंड आरसी उत्तर प्रदेश का पहला निजी विश्वविद्यालय और लखनऊ के बाहर दूसरा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय बन गया है, जिसे एसीसीएलएमपी के तत्वावधान में सीएमई आयोजित करने का गौरव प्राप्त हुआ। पीजीआईएमएस रोहतक से बायोकेमिस्ट्री की एमडी और 2017 में युवा वैज्ञानिक के रूप में एसीबीआई-आईएफसीसी टीएफवाईएस पुरस्कार और 2023 में एसीबीआई-यंग साइंटिस्ट पुरस्कार प्राप्त डॉ. अभ्रा घोष प्रयोगशाला चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर व्यावहारिक कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में देश भर से 40 से अधिक दिग्गज शामिल हुए, जिनमें टेक्स्टबुक ऑफ मेडिकल बायोकेमिस्ट्री के लेखक डॉ. दिनेश पुरी, ईजेआईएफसीसी के सह-मुख्य संपादक डॉ. कन्नन वैद्यनाथन, एसीसीएलएमपी- यूपी की अध्यक्ष और केजीएमयू- लखनऊ में बायोकेमिस्ट्री की विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना सिंह, एएसएमसी- हरदोई के प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई, मिलिट्री हॉस्पिटल- बरेली की डॉ. (कर्नल) दीपिका गुलाटी, अमृता स्कूल ऑफ मेडिसिन- फरीदाबाद के लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. अरुण के. हरिथ, वीएमएमसी और सफदरजंग हॉस्पिटल- दिल्ली की प्रो. (डॉ.) सुकन्या गंगोपाध्याय के साथ-साथ उत्तर भारत के लगभग हर प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के सम्मानित प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष शामिल रहेे। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में बतौर अध्यक्ष आरएमएल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ से डॉ. रीना रानी और अमृता स्कूल ऑफ मेडिसिन फरीदाबाद से डॉ. प्रतीप जना बाहरी और टीएमयू में फिजियोलॉजी के एचओडी डॉ. जयबल्लभ कुमार, माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. सुधीर सिंह शामिल रहे। टीएमयू में बायोकेमिस्ट्री विभाग की एचओडी डॉ. उषा किरण ने निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर और एसीसीएलएमपी केंद्रीय समिति की अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत सेन का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, टीएमयू के एक दशक से भी अधिक समय में बायोकेमिस्ट्री विभाग की यह पहली बड़ी पहल है। यह सीएमई-सह-कार्यशाला वास्तव में सीखने, सौहार्द और उत्साह का एक शानदार उत्सव है। सीएमई-सह-कार्यशाला में टीएमयू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एनके सिंह, मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. एसके जैन, उप-प्राचार्य प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, पैथोलॉजी की विभागाध्यक्षा प्रो. सीमा अवस्थी, माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. उमर फारूक, प्रो. राजुल रस्तोगी, जीआईएमएस नोएडा के प्रख्यात अतिथि प्रो. इजेन भट्टाचार्य की गरिमामयी मौजूदगी रही।

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