Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

भागीरथी कला संगम की बैठक में पहाड़ की पीड़ा,पलायन और जंगली जानवरों के हमलों पर गूंजा चिंतन

श्रीनगर गढ़वाल। सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों को समर्पित संस्था भागीरथी कला संगम की एक महत्वपूर्ण बैठक आज स्थानीय कल्याणेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित की गई। संस्था के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और पहाड़ के सामने खड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में संस्था की अब तक की गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा आने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार-मंथन किया गया। हाल ही में गढ़वाल क्षेत्र में जंगली जानवरों के लगातार बढ़ते हमलों,बढ़ती मानव-वन्यजीव टकराहट तथा ग्रामीणों में व्याप्त भय और असुरक्षा की भावना को लेकर सभी सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव रखे। सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि जंगली जानवरों के हमले केवल समाचार नहीं,बल्कि पहाड़ की दिन-प्रतिदिन बढ़ती पीड़ा और असंतुलन का संकेत हैं। लोगों में जागरूकता की कमी,सुरक्षा उपायों का अभाव और वन विभाग से समन्वय की कमजोर कड़ी इन घटनाओं को और भयावह बना रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्था ने फैसला लिया कि जनगीतों,नुक्कड़ नाटकों,और लघु फिल्मों के माध्यम से गांव-गांव,चौक-चौराहों और विद्यालयों तक जागरूकता पहुंचाई जाएगी। बैठक का प्रमुख निर्णय यह रहा कि संस्था जल्द ही एक प्रभावशाली लघु फिल्म तैयार करेगी जिसमें पहाड़ का लगातार बढ़ता पलायन,जंगली जानवरों से किसानों और महिलाओं का संघर्ष और पर्वतीय जनजीवन पर मंडराते संकट को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। इस फिल्म का उद्देश्य केवल समस्या को दिखाना नहीं,बल्कि समाज और सरकार तक एक संवेदनशील संदेश पहुंचाना है। बैठक की अध्यक्षता भगवती प्रसाद पुरी ने की जिन्होंने संस्था की सांस्कृतिक भूमिका को और मजबूत करने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन मदन गड़ोई ने कुशलता से किया। इस अवसर पर संस्था में जुड़े नए सदस्य अवधेश मणि का सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया और उन्हें भविष्य की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। बैठक में संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,निर्देशक मदन गडोई,सचिव पदमेंद्र रावत,सह सचिव संजय कोठारी,संरक्षक दीनबंधु चौहान,रवि पुरी,धर्मेंद्र कुमार,किशोरी नौटियाल,राजेंद्र रावत सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे। भागीरथी कला संगम की यह बैठक न केवल सांस्कृतिक दिशा तय करने वाली रही,बल्कि पहाड़ की वास्तविक चुनौतियों को संजीदगी से समझते हुए समाधान की दिशा में एक मजबूत सामूहिक कदम भी साबित हुई।

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