Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
छात्रों की गूंज कार्यक्रम के तहत कांग्रेस नेताओं ने किया विद्यार्थियों से संवादभाजपा युवा मोर्चा ऋषिकेश मंडल द्वारा कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट का पुतला दहनसिंधु नदी तट पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में हुआ दिव्य जलाभिषेक एवं दिव्य-भव्य आरतीनैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर भी प्रशासन हरकत में नहीं आया !काशीपुर बाईपास चौड़ीकरण की योजना को मिली मंजूरी, जाम की समस्या से मिलेगी राहतकल मनाया जाएगा संविधान हत्या दिवसतीरंदाजी की चौथी राष्ट्रीय चैंपियनशिप संपन्नदिल्ली का दबदबा हुआ कायम,दूसरे नंबर पर रहा हरियाणाग्रामीण जनसंवाद के जरिए विधायक तिलक राज बेहड़ ने करोड़ों की विकास योजनाओं को दी रफ्तारहेमकुंड साहिब यात्रियों पर हमले के विरोध में सिख समाज का अल्टीमेटम, 24 जून तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन  किच्छा के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा एवं गुरुद्वारा श्री नानक दरबार, आवास विकास की प्रबंधक समितियों ने हेमकुंड साहिब जा रहे सिख श्रद्धालुओं पर कर्णप्रयाग में हुए हमले के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम उपजिलाधिकारी गौरव पांडे को ज्ञापन सौंपा। सिख समाज ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।ज्ञापन में कहा गया कि हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं पर कुछ स्थानीय लोगों द्वारा हमला किया गया, जिससे पूरे सिख समाज में गहरा आक्रोश है। समिति ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है, जहां देश-विदेश से सभी धर्मों के श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी घटनाएं राज्य की छवि को धूमिल करती हैं, इसलिए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।ज्ञापन प्राप्त करने के बाद उपजिलाधिकारी गौरव पांडे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मामले से शासन को अवगत कराया जाएगा तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।सिख समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में भाईचारा और शांति बनाए रखना है, लेकिन यदि 24 जून 2026 तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो उत्तराखंड के सभी गुरुद्वारों के माध्यम से प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों के पदाधिकारी एवं सिख समाज के अनेक सदस्य मौजूद रहे।वार्ड नंबर 12 में नशे के कारोबार से दहशत, क्षेत्रवासियों ने पुलिस से की सख्त कार्रवाई की मांग
राज्य

सशस्त्र सीमा बल प्रशिक्षण केंद्र श्रीनगर और पशुपालन-मत्स्य विभाग के बीच ऐतिहासिक सहमति ज्ञापन


श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड में स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज दिनांक 19 दिसम्बर 2025 को केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र सशस्त्र सीमा बल श्रीनगर एवं मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी तथा जिला मत्स्य प्रभारी पौड़ी गढ़वाल के मध्य एक महत्वपूर्ण सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सहमति ज्ञापन उप महानिरीक्षक सुभाष चंद नेगी के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर को वायब्रेंट योजना के अंतर्गत एक दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जा रहा है,जिससे स्थानीय उत्पादन और संस्थागत उपभोग के बीच सीधा एवं स्थायी सेतु स्थापित होगा। सहमति ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र सीमा बल के केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र श्रीनगर गढ़वाल के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित भेड़,बकरी,पोल्ट्री एवं मछली जैसे खाद्य उत्पादों की नियमित,ताजा एवं गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से प्रशिक्षण केंद्र को उच्च गुणवत्ता वाले पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ प्राप्त होंगे,वहीं दूसरी ओर स्थानीय पशुपालकों,मत्स्य पालकों एवं कृषक उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होगा। यह पहल न केवल ग्रामीण आजीविका सृजन को बढ़ावा देगी,बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सहमति ज्ञापन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इससे बिचौलियों की भूमिका न्यूनतम होगी और उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। साथ ही यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को साकार करने के साथ-साथ वायब्रेंट योजना के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। स्थानीय संसाधनों के उपयोग से न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी,बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी बल मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में इस सहयोग को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा,ताकि अन्य स्थानीय उत्पादों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सके। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा बलों और नागरिक तंत्र के बीच सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। निस्संदेह,यह सहमति ज्ञापन स्थानीय विकास,संस्थागत आवश्यकताओं की पूर्ति और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

Check Also
Close