Thursday 25/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

गढ़़वाली नाटककार एवं रंगकर्मी कुलानन्द घनशाला को प्रदान किया डॉ.गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान-2024


श्रीनगर गढ़़वाल। गढ़वाली भाषा,लोक साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित आखर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा डॉ.गोविन्द चातक की जयंती के उपलक्ष्य में डॉ.गोविन्द चातक स्मृति व्याख्यान’ एवं डॉ.गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान–2024 समारोह का भव्य आयोजन सौरभ होटल श्रीकोट में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर गढ़़वाली नाट्य लेखन एवं रंगकर्म के माध्यम से गढ़़वाली भाषा-साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने हेतु उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध गढ़वाली नाटककार एवं रंगकर्मी कुलानन्द घनशाला को डॉ.गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान-2024 से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें 11,000 रुपए की नकद धनराशि,अंगवस्त्र,सम्मान पत्र एवं विशेष आखर स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। सम्मान राशि डॉ.गोविन्द चातक के परिवार की ओर से प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि आखर ट्रस्ट विगत नौ वर्षों से निरंतर यह आयोजन करता आ रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर डॉ.गोविन्द चातक के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर संगीत शिक्षिका हिमानी फोंदणी द्वारा प्रस्तुत मांगल गीत ने कार्यक्रम को भावपूर्ण वातावरण प्रदान किया। अतिथियों का स्वागत आखर ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष संदीप रावत ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने गढ़वाल के लोक साहित्य एवं गढ़़वाली भाषा में डॉ.गोविन्द चातक के अवदान को चिरस्मरणीय और अतुलनीय बताया तथा उनके जीवन,व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि नगर निगम श्रीनगर की महापौर आरती भण्डारी ने आखर ट्रस्ट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डॉ.गोविन्द चातक जैसी विभूतियों को स्मरण कर प्रतिवर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की कला,संचार एवं भाषा संकायाध्यक्ष तथा सुप्रसिद्ध लेखिका प्रो.मंजुला राणा ने कहा कि डॉ.चातक ने गढ़वाल के लोक साहित्य को सहेजने और संरक्षित करने में जो कार्य किया,वह अद्वितीय है,परंतु उन्हें उनके जीवनकाल में अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया। अति विशिष्ट अतिथि धाद पत्रिका के संपादक एवं लोक कला निष्पादन केन्द्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने कहा कि डॉ.चातक ने दूरस्थ क्षेत्रों के गांव-गांव जाकर लोकगीतों,लोकगाथाओं,जागर,पवाड़ा,चैती गीतों का संकलन कर लोक साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने नई पीढ़ी को डॉ.चातक के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि प्रो.सम्पूर्ण सिंह रावत ने कहा कि डॉ.चातक का व्यक्तित्व विराट होते हुए भी अत्यंत सरल था। उन्होंने सम्पूर्ण गढ़वाली लोक साहित्य को लिपिबद्ध करने का जो कार्य किया, उसके लिए समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा। कुलानन्द घनशाला सम्मान प्राप्त करने पर आखर ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ.गोविन्द चातक की स्मृति में दिया जाने वाला यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायी है। अतिथि वक्ता डॉ.कपिल कुमार ने कहा हिंदी व लोक साहित्य में भी चातक का बड़ा योगदान रहा और हिंदी नाट्य समालोचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया। जब भी उत्तराखंड के लोक साहित्य की चर्चा होगी तो डॉ.चातक का नाम सदैव अग्रिम पंक्ति में रहेगा। आखर के डॉ.नितेश बौंठियाल ने डॉ.गोविन्द चातक को गढ़़वाली लोक साहित्य के प्रथम संग्रहकर्ता,अनुवादक,भाषाविद्,नाट्य समालोचक,नाटककार एवं निबंधकार बताते हुए उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी कहा। आखर के अध्यक्ष संदीप रावत ने सम्मानित नाटककार कुलानन्द घनशाला के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने गढ़़वाली नाट्य लेखन और रंगकर्म के माध्यम से भाषा-साहित्य को समृद्ध किया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.नीलम नेगी ने किया,जबकि अंत में संदीप रावत ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ.गोविन्द चातक के परिवारजन सौरभ बिष्ट,पौड़ी से अरुण बिष्ट,भुपेंद्र नेगी,डॉ.नीलम नेगी,घण्टाकर्ण देवता के रावल दिनेश जोशी,प्रसिद्ध समाजसेवी अनिल स्वामी,डॉ.अरुण कुकसाल,कैप्टन सते सिंह भंडारी,रघुवीर सिंह कंडारी,भारत सिंह कंडारी एवं दर्शन सिंह भंडारी,पूर्व जिला पंचायत सदस्य समाजसेवी लखपत सिंह भंडारी, डॉ.प्रदीप अणथ्वाल,डॉ.नागेंद्र रावत,तरुण नौटियाल,सौरभ पडियार,अंजना घिल्डियाल,अनीता काला,राजेंद्र कैंतुरा,सतीश काला,धनेश्वर द्विवेदी,मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत,ज्योति मेवाड़,रेखा चमोली,हेमा खंडूड़ी,प्रभावती नेगी,साक्षी रावत आदि विद्वान,शिक्षक-शिक्षिकाएं,शोधार्थी,साहित्यकार,समाजसेवी,मीडिया प्रतिनिधि एवं श्रीकोट-श्रीनगर की बड़ी संख्या में गणमान्य जनता उपस्थित रही।

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