हिमालयी आपदा अध्ययन में गढ़वाल विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान–प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं हिमालयी आपदा अध्ययन के प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट को जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा गठित आपदा खतरा,संवेदनशीलता एवं जोखिम मूल्यांकन विषयक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति में सदस्य नामित किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग,जम्मू-कश्मीर द्वारा 6 फरवरी 2026 को जारी सरकारी आदेश संख्या 168-जेके (जीएडी) 2026 के अंतर्गत इस समिति का गठन किया गया है। बहु-आपदाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण का दायित्व गठित विशेषज्ञ समिति जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में भूकंप,बाढ़,भूस्खलन,हिमनदी झील फटने से उत्पन्न बाढ़ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड),वनाग्नि तथा अन्य बहु-आपदाओं के जोखिम का वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन करेगी। समिति का प्रमुख उद्देश्य संभावित आपदाओं की गंभीरता,क्षेत्रीय संवेदनशीलता और जोखिम स्तर का विस्तृत अध्ययन कर एक समग्र रिपोर्ट तैयार करना है,जिससे शासन स्तर पर ठोस और दीर्घकालिक नीति निर्माण संभव हो सके। खतरा मानचित्रण और जोखिम एटलस की तैयारी समिति खतरा मानचित्रण,आपदा जोन निर्धारण तथा जोखिम एटलस तैयार करने का कार्य भी करेगी। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक,पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों का विश्लेषण कर उन्हें जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही अल्पकालिक,मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार कर उन्हें शासन की विकास योजनाओं के साथ एकीकृत करने हेतु ठोस सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी। इससे आपदा प्रबंधन को अधिक सशक्त,वैज्ञानिक और दूरदर्शी बनाया जा सकेगा। प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम,भूस्खलन अध्ययन और जलवायु परिवर्तन संबंधी शोध कार्यों से जुड़े रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उन्हें इस उच्च स्तरीय समिति में शामिल किया जाना गढ़वाल विश्वविद्यालय ही नहीं,बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए सम्मान की बात है। हिमालयी राज्यों में आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए इस प्रकार की विशेषज्ञ समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रो.बिष्ट की सहभागिता से वैज्ञानिक दृष्टिकोण और क्षेत्रीय अनुभव का समन्वय स्थापित होगा,जो नीति निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इसे संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धि बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है। यह नियुक्ति एक बार फिर सिद्ध करती है कि विश्वविद्यालय के शोध और विशेषज्ञता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
