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विदेश भेजने के नाम पर ठगी का जाल: रुद्रपुर में फर्जी इमीग्रेशन कारोबार पर शिकंजा जरूरीरुद्रपुर।शहर में विदेश भेजने के नाम पर संचालित हो रहे इमीग्रेशन सेंटरों की आड़ में बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के मामले उजागर हो रहे हैं। सुनहरे भविष्य और बेहतर रोजगार का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही है, लेकिन अधिकांश मामलों में न तो वादे पूरे हो रहे हैं और न ही कागजी प्रक्रिया समय पर पूरी की जा रही है। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि एजेंसियां पैसा लेने के बाद संपर्क तक तोड़ देती हैं और दस्तावेज अधूरे छोड़ दिए जाते हैं।चिंताजनक तथ्य यह है कि शहर में कई इमीग्रेशन कार्यालय बिना किसी वैध लाइसेंस या सरकारी पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार विदेश भेजने के लिए कार्यरत एजेंट का भारत सरकार के Protector of Emigrants (POE) से पंजीकरण अनिवार्य होता है। इसके अभाव में संचालित गतिविधियां भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती हैं, साथ ही Emigration Act, 1983 के प्रावधानों का भी उल्लंघन माना जाता है।प्रशासन और पुलिस के समक्ष लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें सख्त कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन फर्जी इमीग्रेशन कारोबारियों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो यह नेटवर्क और अधिक फैल सकता है, जिससे आम जनता को आर्थिक और मानसिक क्षति झेलनी पड़ेगी।प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी इमीग्रेशन एजेंसी के झांसे में आने से पहले उसके वैध दस्तावेजों और सरकारी मान्यता की पूरी जांच करें। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

