देवप्रयाग-कीर्तिनगर में गूंजा गौ सम्मान का आध्यात्मिक शंखनाद-संतों की अगुवाई में उठी राष्ट्रव्यापी चेतना

देवप्रयाग/कीर्तिनगर श्रीनगर गढ़वाल। पवित्र संगम नगरी देवप्रयाग और धार्मिक-आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत कीर्तिनगर क्षेत्र आज उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने,जब गौ सम्मान आवाहन अभियान के तहत संत समाज,गौभक्तों और जागरूक नागरिकों ने एकजुट होकर गौमाता के संरक्षण और सम्मान के लिए सशक्त आवाज बुलंद की। इस जनआस्था से जुड़े अभियान का नेतृत्व संत स्वामी नित्याबोधानंद सरस्वती ने किया,जिनके मार्गदर्शन में साधु-संतों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने संगठित होकर तहसील स्तर पर अपनी भावनाओं को प्रशासन तक पहुंचाया। निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत देवप्रयाग और कीर्तिनगर तहसीलों में बड़ी संख्या में जुटे गौप्रेमियों ने गौ रक्षा,संवर्धन और सम्मान की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपे। देवप्रयाग में तहसीलदार बीरम सिंह पंवार तथा कीर्तिनगर में उपजिलाधिकारी मंजू राजपूत को ज्ञापन सौंपते हुए इसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,उत्तराखंड के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री तक प्रेषित करने का आग्रह किया गया। मांगों में प्रमुख विषय प्रार्थना पत्र में गौमाता के संरक्षण के लिए कठोर एवं प्रभावी कदम उठाने,गौवंश के संवर्धन हेतु योजनाओं को सुदृढ़ करने तथा गौमाता को सम्मानजनक स्थान प्रदान करने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। यह केवल एक ज्ञापन नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति,धार्मिक आस्था और भारतीय जीवन मूल्यों की रक्षा का संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत,गौभक्त एवं समाज के विभिन्न वर्गों के जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान इंद्र दत्त रतूड़ी सचिव अरण्यक जन सेवा संस्था देवप्रयाग की विशेष उपस्थिति ने अभियान को और अधिक मजबूती प्रदान की। गौ सम्मान आवाहन अभियान अब केवल स्थानीय पहल नहीं रहा,बल्कि यह उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ एक व्यापक सामाजिक-आध्यात्मिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसमें संत समाज की सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक प्रभावशाली और जन-जन से जुड़ा बना रही है। देवप्रयाग और कीर्तिनगर से उठी यह आवाज केवल गौमाता के सम्मान की मांग नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति,परंपरा और आस्था के संरक्षण का एक प्रबल संदेश है। यह अभियान आने वाले समय में एक बड़े जनजागरण का स्वरूप ले सकता है,जो समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगा। गौमाता का सम्मान-संस्कृति का उत्थान,राष्ट्र का अभिमान।
