4 जुलाई विशेष, मसूरी से जुड़ी हैं जॉर्ज एवरेस्ट की अनगिनत यादें, जिनके नाम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी हुई अमर

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी का इतिहास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें हैं जिन्होंने विश्व इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। इन्हीं में से एक है जॉर्ज एवरेस्ट हाउस, जो ब्रिटिश काल के महान सर्वेक्षक सर जॉर्ज एवरेस्ट की यादों को आज भी संजोए हुए है। 4 जुलाई को उनके जन्मदिवस के अवसर पर यह धरोहर एक बार फिर चर्चा में है। मसूरी के इतिहासकार गोपाल भारद्वाज बताते हैं कि सर जॉर्ज एवरेस्ट वर्ष 1832 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे। इसी दौरान उन्होंने हिमालय सहित पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के विस्तृत सर्वेक्षण का नेतृत्व किया। मसूरी की ऊंची पहाड़ियों और अनुकूल भौगोलिक स्थिति के कारण उन्होंने यहां अपना आवास और सर्वेक्षण केंद्र स्थापित किया, जिसे आज जॉर्ज एवरेस्ट हाउस के नाम से जाना जाता है।
गोपाल भारद्वाज के अनुसार, उस दौर में आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में जॉर्ज एवरेस्ट और उनकी टीम ने कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में पैदल चलकर अत्यंत सूक्ष्म माप किए। इन सर्वेक्षणों ने भारत के सटीक नक्शे तैयार करने की नींव रखी। बाद में वर्ष 1865 में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम उनके सम्मान में रखा गया। उल्लेखनीय है कि स्वयं जॉर्ज एवरेस्ट इस चोटी का नाम अपने नाम पर रखने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उनके उत्तराधिकारी एंड्रयू वॉ ने उनके योगदान को देखते हुए यह प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
इतिहासकार बताते हैं कि मसूरी में स्थित जॉर्ज एवरेस्ट हाउस केवल एक आवास नहीं था, बल्कि यह वैज्ञानिक अनुसंधान और सर्वेक्षण गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहां से दूरबीनों और सर्वेक्षण उपकरणों की सहायता से हिमालय की चोटियों का अध्ययन किया जाता था। इस स्थान ने भारत में आधुनिक भू-मानचित्रण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र
वर्तमान में जॉर्ज एवरेस्ट हाउस मसूरी के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल पर्यटकों को हिमालय की बर्फीली चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के अद्भुत दृश्य एक साथ देखने का अवसर देता है। सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय यहां का प्राकृतिक सौंदर्य विशेष रूप से मनमोहक दिखाई देता है। हाल के वर्षों में इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया गया है। परिसर में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे यह स्थान इतिहास, प्रकृति और एडवेंचर का अनूठा संगम बन गया है। यहां ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और हेरिटेज पर्यटन के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं।
गोपाल भारद्वाज का कहना है कि मसूरी आने वाले अधिकांश पर्यटक इस स्थान को केवल एक व्यू प्वाइंट के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में यह भारत के वैज्ञानिक इतिहास और विश्व के भूगोल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है। जॉर्ज एवरेस्ट हाउस केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि उस युग का साक्षी है, जब मसूरी से बैठकर भारत के भूगोल का नया इतिहास लिखा जा रहा था।
