चिरबटिया में हरियाली का संकल्प-रायल ग्रुप जखोली ने स्थापित की स्मृति वाटिका,देवदार सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे

रुद्रप्रयाग/जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रायल ग्रुप जखोली के सौजन्य से मंगलवार को पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबटिया एवं वन विभाग परिसर के आसपास वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। बरसात के अनुकूल मौसम का लाभ उठाते हुए देवदार सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने रोपे गए पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का सामूहिक संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के दौरान स्मृति वाटिका की स्थापना करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण का आधार नहीं,बल्कि मानव जीवन,जल स्रोतों और जैव विविधता के सबसे बड़े संरक्षक हैं। आज जलवायु परिवर्तन,बढ़ते तापमान और प्राकृतिक असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण और उनका संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इस अवसर पर उपस्थित वन विभाग के अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा,जब प्रत्येक नागरिक इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए रोपे गए पौधों की देखभाल भी करेगा। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है। वक्ताओं ने आह्वान किया कि यदि वृक्षारोपण अभियान जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करे,तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम सामने आएंगे। कार्यक्रम में वन रेंज अधिकारी हरीश थपलियाल,फॉरेस्ट गार्ड मदन सिंह नेगी,सूमेर सिंह कैंतुरा,नागेंद्र इंटर कॉलेज बजीरा के प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह राणा,पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के प्रभारी दीपक भट्ट,सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश महंगाई,डॉ.दीनदयाल भण्डारी,विनोद मनोहर महंगाई,संजय सेमवाल तथा विनोद कपरुवाण सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि रायल ग्रुप जखोली द्वारा स्थापित स्मृति वाटिका को हराभरा बनाए रखने के लिए नियमित रूप से पौधों की देखभाल की जाएगी,ताकि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की एक स्थायी और प्रेरणादायी मिसाल बन सके। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से नहीं,बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी और जनजागरूकता से ही संभव है।
