एथिक्स विश्वविद्यालय उद्घाटन के अवसर पर समलौंण के तहत पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए छात्र-छात्राओं ने थामे जिम्मेदारी के बीज

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के विकास खण्ड में स्थित ग्राम उरेगी में एथिक्स विश्वविद्यालय के उद्घाटन अवसर को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए समलौंण आंदोलन के तहत विशेष पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में संतरा,आम और अमरूद के चार समलौंण पौधों का रोपण किया गया। पौधारोपण को विश्वविद्यालय उद्घाटन का ऐतिहासिक प्रतीक बनाते हुए यह संदेश दिया गया कि शिक्षा और पर्यावरण,दोनों का संरक्षण भविष्य निर्माण के लिए अनिवार्य है। उद्घाटन समारोह में परिसर शंखनाद और मंगल ध्वनियों के बीच हर्षोल्लास का वातावरण रहा। ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गीतों और नारों के साथ पौधारोपण में उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्र-छात्राओं ने पौधों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए संकल्प लिया कि वे इन्हें बड़े मनोयोग से संरक्षित करेंगे। बीए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रीति नेगी ने कहा यह पौधे हमारी पढ़ाई की तरह ही हमारी धरोहर हैं,हम इन्हें अपने जीवन का हिस्सा मानकर संरक्षित करेंगे। वहीं एमए के छात्र अजय रावत ने कहा जन्मदिन पर पौधा रोपित करने की अपील ने हमें गहराई से छुआ है,अब हर जन्मदिन को हम हरियाली से जोड़ेंगे। कार्यक्रम का संचालन समलौंण आंदोलन के जिला संयोजक एवं पत्रकार पवन पटवाल ने किया। उन्होंने कहा वृक्ष हमारे जीवन के प्राण हैं। इनका संरक्षण करना प्रत्येक मानव का परम कर्तव्य है,क्योंकि वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। समलौंण पहल हर जीवन संस्कार को प्रकृति से जोड़ती है और यह भावनात्मक रूप से पर्यावरण चेतना को मजबूत करती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने जन्मदिवस पर विश्वविद्यालय परिसर में एक समलौंण पौधा रोपित कर उसे जीवनभर संरक्षित करें। इस अवसर पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ.दरमान सिंह नेगी,राठ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.जितेंद्र कुमार नेगी,विद्यालय प्रबंधन समिति की सदस्य एवं बीडीसी सदस्य यशोदा नेगी,पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुलदीप रावत,अनुप भारती पब्लिक स्कूल के प्रबंधक कुलदीप गुसाई,सामाजिक कार्यकर्ता मानवेंद्र बिष्ट,सुभाष रावत,अध्यापक गौरव नेगी इंटरमीडिएट कॉलेज परसुंडाखाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। समलौंण आंदोलन की शुरुआत पहाड़ों से हुई,जिसका मूल उद्देश्य हर जीवन संस्कार को पौधारोपण से जोड़ना है। चाहे जन्म हो या विवाह,उत्सव हो या शोक-हर अवसर पर पौधे रोपित कर उन्हें संरक्षित करने की परंपरा ने समाज में पर्यावरण संरक्षण की नई चेतना जगाई है। आज गांव-गांव में समलौंण सेनाएँ गठित होकर इस पहल को आगे बढ़ा रही हैं,जिसके कारण पहाड़ों में हरियाली का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। यह आंदोलन केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं,बल्कि जीवन और प्रकृति को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।