गढ़वाली अस्मिता का उत्सव-इन्कलाब आणु चा के विमोचन से श्रीनगर में सजेगा शब्दों का लोक-उत्सव

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि की वादियों में एक बार फिर शब्दों की सरगम गूंजने को है। गढ़वाली भाषा और लोक-संवेदना के सशक्त हस्ताक्षर राकेश मोहन कण्डारी की बहुप्रतीक्षित काव्य कृति इन्कलाब आणु चा का भव्य विमोचन 3 मई 2026 को श्रीनगर में आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन केवल एक पुस्तक के लोकार्पण का अवसर नहीं,बल्कि गढ़वाली भाषा की आत्मा,लोकजीवन की पीड़ा,संघर्ष और उम्मीदों के सामूहिक उत्सव का क्षण है। नगर निगम सभागार में प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होने वाला यह समारोह साहित्य,संस्कृति और जनचेतना के त्रिवेणी संगम के रूप में सामने आएगा। कार्यक्रम में श्रीनगर की महापौर आरती भण्डारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी,जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत और ब्लॉक प्रमुख पौड़ी अस्मिता नेगी विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ संस्कृति कर्मी डॉ.डी.आर.पुरोहित करेंगे,जिनकी विद्वता और अनुभव इस आयोजन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक विमर्श कार्यक्रम की आत्मा होगा,जिसमें प्रख्यात साहित्यकार गणेश खुगशाल (गणी) और ओमप्रकाश सेमवाल गढ़वाली साहित्य की वर्तमान धारा,उसकी जड़ों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने गहन विचार साझा करेंगे। यह विमर्श न केवल साहित्यिक दृष्टि को समृद्ध करेगा,बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा भी देगा। इन्कलाब आणु चा शीर्षक अपने आप में एक पुकार है-एक ऐसा आह्वान,जो शब्दों के माध्यम से समाज में चेतना,परिवर्तन और आत्मबोध की अलख जगाने का सामर्थ्य रखता है। कण्डारी की कविताएं गढ़वाल के लोकजीवन की धड़कनों को शब्द देती हैं-जहां प्रकृति की निस्संगता है,वहां मनुष्य का संघर्ष भी है,जहां पीड़ा है,वहीं उम्मीद की लौ भी टिमटिमाती है। आयोजन का दायित्व एमसी लोक साहित्य मंच श्रीनगर गढ़वाल द्वारा निभाया जा रहा है,जो निरंतर लोकभाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह साहित्यिक महोत्सव गढ़वाली भाषा प्रेमियों,रचनाकारों,विद्यार्थियों और समाज के हर उस वर्ग के लिए विशेष महत्व रखता है,जो अपनी जड़ों से जुड़कर भविष्य की दिशा तय करना चाहता है। आयोजकों ने सभी साहित्यप्रेमियों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें और गढ़वाली भाषा के इस नवोदय को अपनी उपस्थिति से सशक्त करें। यह केवल एक विमोचन नहीं यह शब्दों में समाई संस्कृति,संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव है।
