Saturday 27/ 06/ 2026 

Bharat Najariya
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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में शिक्षक आवास और कार्यस्थल दूरी का पालन अनिवार्य करने की मांग आरटीआई कार्यकर्ता कुशलानाथ ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट स्तर तक कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को उनके कार्यस्थल से 8 किलोमीटर के भीतर निवास करने और विद्यालय में नियमित 8 घंटे रहने के आदेश एवं निर्देश लागू करने हेतु आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कुशलानाथ ने राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि उत्तराखंड में अधिकांश स्कूल दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। जबकि कुछ सुगम स्कूल शहरी क्षेत्रों या मुख्य मार्गों के पास हैं,वहां अध्यापक प्रतिदिन औसतन 40 से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचते हैं। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है,बल्कि विभागीय आदेशों का उल्लंघन भी हो रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि शिक्षक वर्ग अक्सर बच्चों के हित में अन्य जिम्मेदारियां,जैसे बीएलओ ड्यूटी,जनगणना आदि से बचने की प्रवृत्ति दिखाता है। वहीं राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों का समय 10 बजे से 5 बजे तक है,जबकि स्कूल समय सुबह 7.30 बजे से 1 बजे तक निर्धारित है। इससे शिक्षकों के लंबे दूरी तय करने और समय पर विद्यालय में उपस्थित रहने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। कुशलानाथ ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि विद्यालयों में अध्यापन कार्य कम से कम 7-8 घंटे नियमित रूप से होना चाहिए। इसके साथ ही सभी सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों से उपजिलाधिकारी या खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शपथ पत्र लिया जाए कि वे 8 किलोमीटर के भीतर निवास करते हैं। शपथ पत्र में मकान मालिक का नाम भी दर्ज किया जाए। पत्र में मुख्यमंत्री से यह अनुरोध भी किया गया कि बच्चों के हित और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण शिक्षक एवं सरकारी कर्मचारियों के लिए 8 किलोमीटर के भीतर निवास और 8 घंटे विद्यालय में अनिवार्य रहने के आदेश जारी किए जाएं। कुशलानाथ ने कहा इस कदम से न केवल विभागीय कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी,बल्कि बच्चों को अधिक समय और शिक्षा उपलब्ध होगी। नियमों का पालन सुनिश्चित होने से शैक्षिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन भी आएगा। पत्र की प्रतिलिपि शिक्षा महानिदेशक उत्तराखंड शासन को भी भेजी गई है।

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