धर्म और प्रकृति का संगम-झालीमाली मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा संग मोरपंखी का समलौंण पौधारोपण

श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खंड पौड़ी पट्टी पैडुलस्यूं के बाराजूला कंडारा बाजार स्थित झालीमाली मंदिर परिसर में नवरात्र की नवमी के पावन अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास के बीच माता झाली माली की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं की भीड़,भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस अवसर को यादगार और संदेशपरक बनाने के लिए मंदिर परिसर में मोरपंखी का समलौंण पौधा रोपित किया गया। यह पौधारोपण केवल एक धार्मिक कृत्य न होकर,प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवन के संकल्प का प्रतीक बना। पौधे की देखभाल एवं संरक्षण का उत्तरदायित्व मंदिर के मुख्य पुजारी सतीश चंद्र ममगांई ने स्वयं ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन समलौंण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगांई ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा मानव का प्रकृति से अटूट रिश्ता प्राचीन काल से रहा है। वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं,इनका संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का धर्म भी है। प्रकृति हमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत लाभ देती है,इसलिए हमें इसे बचाने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने आगे कहा कि समलौंण पहल हर संस्कार,हर धार्मिक अनुष्ठान और हर जीवन-घटना के अवसर पर पौधारोपण को बढ़ावा देने का अभियान है। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं,बल्कि समाज में पर्यावरण चेतना का बीज बोना है। सावित्री देवी ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि असंतुलित होते पर्यावरण को संतुलित करने के लिए वे हर शुभ अवसर पर समलौंण पौधारोपण अवश्य करें। प्राण प्रतिष्ठा और पौधारोपण कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनता का उत्साह देखने लायक रहा। श्रद्धालुओं ने देवी मां के चरणों में प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद लिया और पौधारोपण के इस संकल्प में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इस अवसर पर वीरेंद्र सिंह,रमेश चंद्र ममगांई,मनोज कुमार ममगांई,महेंद्र ममगांई,कुसुम खंडूड़ी,पुष्पा देवी,आनंद सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व क्षेत्रवासी मौजूद रहे। मंदिर प्रांगण में सम्पन्न यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था और पर्यावरण चेतना का संगम बन गया।