संस्कार और पर्यावरण का संगम-अद्विक के चूड़ाकर्म पर रोपा गया समलौण पौधा

श्रीनगर गढ़वाल। पर्यावरण संरक्षण और परंपराओं के सुंदर मेल का उदाहरण उस समय देखने को मिला जब जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खंड खिर्सू के ग्राम गोदा छोरा में चूड़ाकर्म संस्कार एक नई मिसाल बन गया। लक्ष्मी दत्त गोदियाल के पोत्र एवं द्वारिका प्रसाद गोदियाल व सपना गोदियाल के पुत्र अद्विक गोदियाल के चूड़ाकर्म संस्कार के उपलक्ष्य में परिवारजनों ने घर के आंगन में अमरूद का पौधा रोपकर न केवल इस विशेष अवसर को यादगार बनाया बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का प्रेरणादायक संदेश भी दिया। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी अद्विक के दादा लक्ष्मी दत्त गोदियाल ने स्वयं ली। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन के संस्थापक बीरेंद्र दत्त गोदियाल ने किया। उन्होंने कहा कि आज मानव अपने स्वार्थ में प्रकृति को लगातार भूलता जा रहा है। जंगल घटते जा रहे हैं,प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और परिणामस्वरूप समय पर बारिश न होना,हिमालय की बर्फ का तेजी से पिघलना,ग्लोबल वार्मिंग,जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इन सबसे बचने का एकमात्र उपाय यही है कि हम प्रकृति के प्रति सजग रहें और पौधों को जीवन से जोड़ें। उन्होंने बताया कि समलौण आंदोलन एक भावनात्मक पहल है,जिसके तहत जीवन के हर संस्कार में पौधा रोपण किया जाता है। उस पौधे को समलौण पौधा कहा जाता है और पूरा परिवार मिलकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाता है। यह पहल केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहती बल्कि पौधों को काटे जाने से बचाने तक जाती है। बीरेंद्र दत्त गोदियाल ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे विवाह,जन्म,नामकरण,चूड़ाकर्म और अन्य सभी पारिवारिक संस्कारों पर समलौण पौधारोपण करें ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके। इस अवसर पर आराध्या,ओमप्रकाश भट्ट,सुषमा भट्ट,दीपक गोदियाल,सीमा देवी,अनिरुद्ध,आयुषी,कुसुम नौडियाल,वृषभ,आयुष,अरुण गोदियाल,निहारिका,जगमोहन गोदियाल,आरव,गौरव नौटियाल,राजन नौटियाल,मुकुल,रिंकी नौटियाल,रोहन नौटियाल तथा पंडित नीरज गोदियाल सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।