बेस चिकित्सालय के ब्लड सेंटर में कर्मियों को दिया जीवनरक्षक प्रशिक्षण

श्रीनगर गढ़वाल। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय स्थित ब्लड सेंटर में शुक्रवार को जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन प्रक्रिया) का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ब्लड सेंटर के तकनीशियन,नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी आपात परिस्थितियों के लिए तैयार करना था,जब किसी व्यक्ति की हृदय गति अचानक रुक जाए,सांस थम जाए या नाड़ी का स्पंदन महसूस न हो। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने प्रतिभागियों को सीपीआर की वैज्ञानिक पद्धति का विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। डॉ.सिंह ने बताया कि हृदय गति रुकने की स्थिति में प्रारंभिक कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तत्काल और सही तकनीक से सीपीआर दिया जाए तो मस्तिष्क और हृदय तक रक्त प्रवाह बनाए रखा जा सकता है, जिससे व्यक्ति को पुनः जीवन मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को छाती पर दबाव देने की सही गति,सांस देने की विधि तथा आपात स्थिति में संयम और त्वरित निर्णय लेने के महत्व को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण के दौरान कर्मियों ने मैनिकिन (डमी मॉडल) पर अभ्यास कर वास्तविक परिस्थिति जैसी तैयारी का अनुभव प्राप्त किया। डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने बताया कि उनकी टीम पिछले दो वर्षों में विभिन्न विद्यालयों,महाविद्यालयों और संस्थानों में 2500 से अधिक लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण दे चुकी है। यह प्रयास समाज में जीवनरक्षक कौशल के प्रसार की दिशा में एक सराहनीय अभियान बन चुका है। कार्यक्रम में ब्लड सेंटर की प्रभारी डॉ.दीपा हटवाल सहित तकनीशियन,नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे समय की आवश्यकता करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में कार्यरत प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष होना चाहिए। अचानक हृदयाघात या श्वसन अवरोध की स्थिति में तत्काल दी गई प्राथमिक सहायता कई बार मरीज के जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी तय कर देती है। बेस चिकित्सालय में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल चिकित्सा कर्मियों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है,बल्कि आम जनमानस में भी जीवनरक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है। देवभूमि की धरती पर स्वास्थ्य सेवाओं को संवेदनशील और सक्षम बनाने का यह प्रयास निश्चित ही आने वाले समय में कई अनमोल जिंदगियों को बचाने में सहायक सिद्ध होगा।
