थलीसैंण के कफलगांव में प्रशासन उतरा जनता के द्वार-53 शिकायतें दर्ज,50 का मौके पर समाधान,512 ग्रामीणों ने उठाया लाभ

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जन-जन की सरकार,जन-जन के द्वार अभियान के अंतर्गत विकासखंड थलीसैंण की न्याय पंचायत बूंगीधार स्थित कफलगांव पंचायत भवन में आयोजित बहुउद्देश्यीय शिविर में प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद देखने को मिला। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्र में आयोजित इस शिविर ने शासन की मंशा को जमीनी हकीकत में बदलते हुए ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया। शिविर में कुल 53 शिकायतें दर्ज की गईं,जिनमें से 50 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों को सौंपते हुए शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए। यह त्वरित कार्रवाई ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आई और प्रशासन की तत्परता का स्पष्ट संदेश भी दिया। शिविर में 512 ग्रामीणों ने प्रतिभाग कर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों से योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही 38 पात्र व्यक्तियों के आवश्यक प्रमाण पत्र मौके पर ही बनाए गए तथा 57 लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित किया गया। शिविर की अध्यक्षता एसडीओ सिविल एवं सोयम पौड़ी राखी जुयाल ने की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शेष समस्याओं का समाधान समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। शिविर में स्वास्थ्य,समाज कल्याण,राजस्व,वन,आयुर्वेदिक एवं यूनानी,पशुपालन,कृषि,उद्यान सहित कुल 23 विभागों के स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर पंजीकरण,आवेदन और लाभ वितरण की प्रक्रिया भी पूरी की गई। नोडल अधिकारी शिविर एवं अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग विनोद कुमार जोशी,एई गजेन्द्र सिंह राणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कफलगांव में आयोजित यह बहुउद्देश्यीय शिविर केवल शिकायत निवारण का मंच नहीं रहा,बल्कि यह प्रशासन और जनता के बीच विश्वास,पारदर्शिता और सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। पहाड़ के दूरस्थ गांव में सरकार की सक्रिय उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि विकास की धारा अब गांव-गांव तक पहुंच रही है।
