Wednesday 29/ 04/ 2026 

Bharat Najariya
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राज्य

अब गढ़वाल से निहारेंगे ब्रह्मांड-गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आइकार्ड की स्थापना से खगोल विज्ञान को मिली नई उड़ान


श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की शांत वादियों में अब विज्ञान की एक नई किरण फूट पड़ी है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र,पुणे के सहयोग से अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान अनुसंधान एवं विकास केंद्र (आइकार्ड) की स्थापना कर दी गई है। यह पहल न केवल गढ़वाल बल्कि पूरे उत्तराखंड में वैज्ञानिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा वर्ष 1992 में स्थापित यह अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र देशभर में खगोल भौतिकी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। अब उसी प्रतिष्ठित संस्थान के सहयोग से स्थापित आइकार्ड केंद्र चौरास परिसर को उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान की दिशा में नई पहचान देने जा रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य खगोल विज्ञान को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे प्रयोगात्मक और अनुभवात्मक रूप में छात्रों तक पहुंचाना है। इसके तहत नवाचारी शिक्षण विधियों,संरचित दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों,कार्यशालाओं,ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन प्रशिक्षण शिविरों तथा शैक्षणिक बैठकों का नियमित आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों में विद्यालयी और विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर अपने ज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे। केंद्र के संयोजक प्रो.हेमवती नन्दन ने बताया कि आइकार्ड विद्यार्थियों,शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए एक सशक्त प्रेरणा मंच सिद्ध होगा। यह न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करेगा,बल्कि खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी में अंतरविषयक अध्ययन को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक समझ के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा,जिससे छात्र वास्तविक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने इस महत्वपूर्ण पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केंद्र विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान प्रसार कार्यक्रमों को नई मजबूती देगा और भविष्य में इसे राष्ट्रीय ही नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। वहीं कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति की दिशा में मील का पत्थर बताया। गढ़वाल की धरती पर स्थापित यह आइकार्ड केंद्र अब युवाओं को आसमान छूने ही नहीं,बल्कि तारों को समझने और ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने की प्रेरणा देगा,यही इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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